जेनरेटिव AI अब मार्केटिंग से हटकर Google के 'Rambler' जैसे प्रैक्टिकल टूल्स पर फोकस कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ, Tata Sons और Tata Trusts के बीच चेयरमैन की नियुक्ति को लेकर मचे विवाद ने बड़ी चिंताएं खड़ी कर दी हैं, जिसका असर **$14 बिलियन** के सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट पर पड़ सकता है।
टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। सालों तक AI का इस्तेमाल केवल मार्केटिंग के लिए किया गया, लेकिन अब इसका झुकाव रोजमर्रा के उपयोगी टूल्स की तरफ हो रहा है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण Google Pixel 11 Pro है, जिसमें दिया गया 'Rambler' फीचर Gboard को काफी एडवांस बनाता है, जो वॉइस इनपुट को सटीक सर्च क्वेरी में बदल देता है।\n\nभारत में भी AI का फोकस बदल रहा है। जहाँ ग्लोबल कंपनियां महंगे फीचर्स पर काम कर रही हैं, वहीं Sarvam और BharatGen जैसे संस्थान किफायती और घरेलू इस्तेमाल वाले मॉडल्स पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं ताकि ग्लोबल प्रतिस्पर्धा में बने रह सकें।\n\n### Tata Group में सत्ता का संघर्ष\n\nतकनीकी प्रगति के बीच भारत के सबसे बड़े बिजनेस ग्रुप 'Tata Group' में हलचल तेज है। Tata Sons और इसकी 66% हिस्सेदार Tata Trusts के बीच एन. चंद्रशेखरन को तीसरी बार चेयरमैन बनाने को लेकर बोर्डरूम में असहमति सामने आई है। यह झगड़ा ग्रुप की आंतरिक गवर्नेंस पर सवाल खड़े कर रहा है।\n\n### RBI और निवेशकों पर असर\n\nस्थिती तब और जटिल हो गई जब RBI ने Tata Sons की उस अपील को खारिज कर दिया जिसमें कंपनी ने खुद को 'Core Investment Company' के तौर पर डी-रजिस्टर करने की मांग की थी। इसे बाजार में Tata Sons की लिस्टिंग की दिशा में एक रेगुलेटरी दबाव माना जा रहा है।\n\nनिवेशकों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि क्या यह गवर्नेंस विवाद कंपनी के $14 बिलियन के सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट को धीमा कर देगा। फिलहाल, निवेशकों को बोर्डरूम विवाद के समाधान और कंपनी की लिस्टिंग से जुड़े अपडेट्स पर पैनी नजर रखने की जरूरत है।
