दुनिया भर की ट्रेडिशनल टेक्नोलॉजी सर्विसेज कंपनियों के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी है। साल 2030 तक **$200 बिलियन** के AI मार्केट का फायदा उठाने के लिए कंपनियों को अपने **90%** कर्मचारियों को रिट्रेन करना होगा, वरना बढ़ती लागत कंपनी के मार्जिन को भारी नुकसान पहुँचा सकती है।
टेक्नोलॉजी सर्विसेज सेक्टर में अब एक बड़े बदलाव की जरूरत है। Boston Consulting Group की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2030 तक ग्लोबल सर्विसेज मार्केट $2.4 ट्रिलियन तक पहुँचने की उम्मीद है, जिसमें से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का योगदान करीब $200 बिलियन रहने का अनुमान है। बड़ी टेक कंपनियों के लिए असली परीक्षा यह है कि वे अपने मौजूदा स्टाफ को सिर्फ AI टूल्स इस्तेमाल करने वाला नहीं, बल्कि AI सॉल्यूशंस बनाने वाला एक्सपर्ट कैसे बनाएँ।
टैलेंट गैप और चुनौती
फिलहाल ट्रेडिशनल टेक कंपनियों में केवल 10% से 15% कर्मचारी ही अप्लाइड AI प्रोफेशनल हैं। इसकी तुलना में AI-नेटिव कंपनियां 95% स्पेशलाइज्ड टैलेंट के साथ काम कर रही हैं। इस गैप को पाटने के लिए पुरानी टेक कंपनियों को अपने 85% से 90% वर्कफोर्स को AI की स्पेशलाइज्ड भूमिकाओं के लिए तैयार करना होगा।
निवेशकों के लिए चेतावनी
निवेशकों को यहाँ मुनाफे और खर्चों पर खास नजर रखनी होगी। बाजार से नया AI टैलेंट हायर करना अभी मौजूदा टेक्नोलॉजी रोल्स की तुलना में 35% महंगा पड़ता है। अगर कंपनियां केवल बाहर से लोगों को भर्ती करने पर निर्भर रहीं, तो उनके ऑपरेटिंग मार्जिन पर भारी दबाव पड़ना तय है। इसलिए, अब डेटा साइंटिस्ट्स और इंजीनियर्स को घर के अंदर ही रिट्रेन करने पर जोर दिया जा रहा है।
आने वाले समय में उन कंपनियों के शेयर बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं, जो अपने कर्मचारियों के लिए स्पष्ट करियर पाथ और ट्रेनिंग प्रोग्राम्स बनाकर मार्जिन को सुरक्षित रख सकेंगी। निवेशकों को अब यह ट्रैक करना होगा कि कौन सी कंपनी AI से रेवेन्यू तो बढ़ा रही है, लेकिन बिना एम्प्लॉई कॉस्ट बढ़ाए।
