आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपनाने की होड़ में टेक कंपनियों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। स्पेशलाइज्ड टैलेंट के लिए भारी-भरकम सैलरी और लगातार हो रहे सिक्योरिटी ब्रीच से कंपनियों का मार्जिन दबाव में है।
टेक सेक्टर इस वक्त एक बड़े बदलाव से गुजर रहा है। AI का इस्तेमाल कंपनी की ग्रोथ के लिए जरूरी तो है, लेकिन इसकी कीमत अब बैलेंस शीट पर दिखने लगी है।
सैलरी का बढ़ता बोझ
साल 2026 के डेटा के अनुसार, AI में स्पेशलाइज्ड इंजीनियर्स का सालाना पैकेज $1,80,000 से $2,50,000 के बीच पहुंच गया है। कंपनियों के बीच टैलेंट को रिटेन करने की होड़ से ऑपरेटिंग एक्सपेंस लगातार बढ़ रहे हैं। यदि कंपनियां अपने AI प्रोजेक्ट्स से तेज रेवेन्यू ग्रोथ नहीं दिखा पाती हैं, तो यह सीधे उनके प्रॉफिट मार्जिन को निचोड़ देगा। साथ ही, इंजीनियर्स में बढ़ते 'बर्नआउट' ने भी ऑपरेशन्स के सामने चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
'ब्लैक अक्टूबर' और सुरक्षा का संकट
हाल ही में 'ब्लैक अक्टूबर' के दौरान 9 से ज्यादा प्रमुख AI प्लेटफॉर्म्स पर सिक्योरिटी ब्रीच और 'एजेंट-स्वार्म' अटैक देखे गए। रिसर्च बताती है कि 68% संस्थानों को AI के चलते डेटा लीक का सामना करना पड़ा है। निवेशकों के लिए यह केवल टेक्निकल ग्लिच नहीं, बल्कि ब्रांड की साख और भारी-भरकम जुर्माने का बड़ा रिस्क है।
दिवालिया होने का खतरा
Character.AI जैसी छोटी कंपनियों के 'चैप्टर 11' (दिवालिया) फाइल करने से डेटा प्राइवेसी पर भी सवाल उठे हैं। 39 अमेरिकी राज्यों के अटॉर्नी जनरल अब इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या कंपनियों के दिवालिया होने पर यूजर का प्राइवेट डेटा लिक्विडेशन एसेट के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
निवेशकों को अब केवल ग्रोथ नहीं, बल्कि AI गवर्नेंस और सिक्योरिटी ऑडिट की मजबूती पर ध्यान देने की जरूरत है। भारत और अमेरिका जैसे देशों में डेटा हैंडलिंग पर बढ़ती रेगुलेटरी सख्ती के बीच, कमजोर डेटा सुरक्षा वाली कंपनियां आने वाली तिमाही में कानूनी और वित्तीय संकट में फंस सकती हैं।
