एक 29 साल का भारतीय IT वर्कर एक साथ दो फुल-टाइम जॉब्स करके हर महीने ₹7 लाख कमा रहा है। ₹80 लाख का पोर्टफोलियो बनाने के बावजूद, AI से नौकरी जाने का खतरा और बढ़ती पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण वह लगातार पैसों की चिंता में डूबा रहता है।
डबल जॉब्स से मोटी कमाई, पर 16 घंटे काम!
भारत में 'मूनलाइटिंग' यानी एक साथ कई फुल-टाइम जॉब्स करने का चलन बढ़ता जा रहा है। इसी ट्रेंड को फॉलो करते हुए एक 29 वर्षीय IT प्रोफेशनल ने दो नौकरियां एक साथ करके हर महीने ₹7 लाख की कमाई का अनोखा रिकॉर्ड बनाया है। हालांकि, इस कमाई के लिए उसे दिन के लगभग 16 घंटे काम करना पड़ता है। परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने और पुरानी परेशानियों से उबरने की चाहत में वह इतना ज्यादा काम कर रहा है, लेकिन इस वजह से उसकी पर्सनल लाइफ लगभग खत्म सी हो गई है।
₹80 लाख का पोर्टफोलियो, फिर भी बढ़ रहे खर्चे!
अपनी धांसू कमाई के अलावा, इस प्रोफेशनल ने ₹80 लाख से ज्यादा की नेट एसेट वैल्यू (Net Asset Value) भी बना ली है। इसके पोर्टफोलियो में म्यूचुअल फंड, स्टॉक और फिक्स्ड डिपॉजिट जैसे निवेश शामिल हैं। साथ ही, उसके पास दो घर और एक कार भी है। इन सब के बावजूद, घर में नए सदस्य (बच्चे) के आने और नए घर व गाड़ी के EMI का बोझ बढ़ने से उस पर फाइनेंशियल प्रेशर बढ़ रहा है। आने वाले समय में उसके मंथली खर्चे ₹1.3 लाख से ₹1.4 लाख तक पहुंचने का अनुमान है। एक हाई-अर्नर से हाई-एक्सपेंस लाइफस्टाइल में यह बदलाव शहरी प्रोफेशनल्स के लिए एक आम चुनौती है, जो लोन चुकाने के साथ-साथ आक्रामक सेविंग के लक्ष्य को साधने की कोशिश कर रहे हैं।
AI का बढ़ता खतरा
इतनी मोटी कमाई के बावजूद, इस प्रोफेशनल की सबसे बड़ी चिंता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का IT सेक्टर में तेजी से बढ़ता दखल है। सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, टेस्टिंग और डेटा मैनेजमेंट जैसे कई काम AI टूल्स की मदद से ऑटोमेट हो रहे हैं, जिससे इंडस्ट्री में जॉब सिक्योरिटी पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में, जो लोग दो फुल-टाइम जॉब्स कर रहे हैं, उनके लिए खतरा और भी बढ़ जाता है। अगर काम की मांग कम हुई या कंपनियों ने एम्प्लॉई प्रोडक्टिविटी को लेकर अपनी पॉलिसी बदली, तो उसकी दोनों नौकरियों पर एक साथ संकट आ सकता है। नौकरी जाने का यह डर ही उसे इतना ज्यादा काम करने पर मजबूर कर रहा है।
IT सेक्टर के लिए मायने
यह कहानी भारतीय IT सेक्टर के लिए कई बड़े ट्रेंड्स को दिखाती है। कंपनियां ऑपरेशनल एफिशिएंसी (Operational Efficiency) बढ़ाने के लिए AI का इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे भविष्य में कर्मचारियों की जरूरतें बदल सकती हैं। वहीं, मूनलाइटिंग अभी भी कॉर्पोरेट पॉलिसी में एक बड़ा मुद्दा है, लेकिन यह कर्मचारियों के मन में लॉन्ग-टर्म करियर सिक्योरिटी को लेकर बढ़ रही चिंता को भी उजागर करता है। इन्वेस्टर्स (Investors) आने वाले समय में बड़ी IT सर्विसेज कंपनियों द्वारा टैलेंट रिटेंशन (Talent Retention) और AI इंटीग्रेशन (AI Integration) को मैनेज करने के तरीके पर नजर रखेंगे, क्योंकि ये फैक्टर्स सीधे तौर पर पेरोल कॉस्ट (Payroll Cost) और सर्विस डिलीवरी (Service Delivery) को प्रभावित करते हैं। इस प्रोफेशनल का अगले छह सालों में ₹7 से ₹8 करोड़ का कॉर्पस (Corpus) बनाने का लक्ष्य, एक नौकरी छोड़ने से पहले, अभी भी बाकी है, जो उसके लगातार काम करने और वर्तमान जॉब्स की स्टेबिलिटी पर निर्भर करता है।
