आईटी सेक्टर की दो बड़ी कंपनियों, Tech Mahindra और Wipro के तिमाही नतीजों ने अलग-अलग तस्वीर पेश की है। Tech Mahindra के मुनाफे में **6.7%** का उछाल आया है, जो पिछले तीन सालों में सबसे मजबूत ग्रोथ है। वहीं, Wipro को **4.7%** की गिरावट और रेवेन्यू में **1.4%** की कमी का सामना करना पड़ा है। यह नतीजे दिखाते हैं कि कैसे भारतीय आईटी कंपनियां बदलती मांग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के एकीकरण से निपट रही हैं।
Tech Mahindra की दमदार परफॉर्मेंस
Tech Mahindra के पहली तिमाही के नतीजे काफी उत्साहजनक रहे। कंपनी ने 2.2% की सीक्वेंशियल रेवेन्यू ग्रोथ के साथ $1.66 बिलियन का आंकड़ा पार किया। वहीं, नेट प्रॉफिट में 6.7% का इजाफा हुआ और यह $154 मिलियन तक पहुंच गया। यह कंपनी की पिछले तीन सालों की सबसे तेज ग्रोथ है। इस शानदार प्रदर्शन का एक बड़ा श्रेय ऑपरेटिंग मार्जिन में 60 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी को जाता है, जो अब 14.4% पर पहुंच गया है। यह लगातार ग्यारहवीं तिमाही है जब कंपनी ने अपने प्रॉफिट मार्जिन में सुधार दिखाया है, जिसका मुख्य कारण हाई-वैल्यू डील्स मिलना और ऑटोमेशन का अधिक इस्तेमाल है।
Wipro के सामने मार्जिन और रेवेन्यू का दबाव
दूसरी ओर, Wipro के लिए यह तिमाही थोड़ी चुनौतीपूर्ण रही। कंपनी का रेवेन्यू 1.4% घटकर $2.61 बिलियन रह गया। वहीं, नेट प्रॉफिट में पिछली तिमाही की तुलना में 4.7% की गिरावट आई और यह $355 मिलियन पर आ गया। Wipro के ऑपरेटिंग मार्जिन 130 बेसिस पॉइंट घटकर 16% पर आ गए, जो लगभग तीन साल का निचला स्तर है। कंपनी के मैनेजमेंट ने इस प्रदर्शन के लिए सैलरी हाइक्स से जुड़े खर्चे, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में शुरुआती निवेश और बड़े डील्स की सीमित संख्या जैसे कारणों का हवाला दिया है। CEO Srinivas Pallia ने कहा कि ग्राहकों का खर्च अभी भी धीमा है, जो दर्शाता है कि बाजार में मांग की स्थिति में कोई सुधार नहीं दिख रहा है।
रणनीतिक बदलाव और वर्कफोर्स मैनेजमेंट
दोनों कंपनियां ऐसे दौर से गुजर रही हैं जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पारंपरिक आउटसोर्सिंग बिजनेस मॉडल को बदल रहा है। Tech Mahindra के CEO, Mohit Joshi, मजबूत ऑर्डर बुक और स्थिर क्लाइंट संबंधों के कारण आगे भी ग्रोथ की उम्मीद जता रहे हैं, भले ही यह तिमाही मौसमी रूप से थोड़ी कमजोर होती है। वहीं, Wipro को लंबे समय के तकनीकी निवेश और मौजूदा बाजार की चुनौतियों के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है।
दोनों फर्मों के बीच का यह अंतर उनके वर्कफोर्स मैनेजमेंट में भी दिख रहा है। Tech Mahindra ने तिमाही के दौरान 863 कर्मचारियों की छंटनी की, जिससे कर्मचारियों की कुल संख्या 146,760 हो गई। इसके विपरीत, Wipro ने 888 कर्मचारियों को बढ़ाया, जिससे कर्मचारियों की कुल संख्या 243,044 तक पहुंच गई। स्टाफिंग के ये अलग-अलग तरीके ऐसे समय में सामने आए हैं जब इंडस्ट्री यह मूल्यांकन कर रही है कि ऑटोमेशन कैसे मानव श्रम की जगह ले सकता है या उसे बढ़ा सकता है।
निवेशक आगे चलकर इन कंपनियों द्वारा लागत प्रबंधन और ऑर्डर हासिल करने की क्षमता पर ध्यान देंगे। प्रमुख प्रतिद्वंद्वी Tata Consultancy Services और HCL Technologies के स्थिर लेकिन कमजोर प्रदर्शन के बाद, अब सबकी निगाहें Infosys पर हैं, जिसके नतीजे 23 जुलाई को आने वाले हैं। इन कंपनियों की लाभप्रदता बनाए रखने की क्षमता, खासकर जब ग्राहक खर्च कम हो, एक महत्वपूर्ण कड़ी बनी रहेगी।
