सैन फ्रांसिस्को की स्टार्टअप कंपनी Tavus ने 'Griffin' नाम का एक नया AI मॉडल पेश किया है, जो रियल-टाइम में इंसानों की तरह वीडियो कॉल कर सकता है। इसकी सटीकता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि करीब **48%** लोग इसे असली इंसान समझ बैठे।
Griffin की ताकत: मशीन या इंसान?
पारंपरिक AI मॉडल अक्सर जवाब देने के लिए यूजर के चुप होने का इंतजार करते हैं, लेकिन Griffin 'वीडियो-टू-वीडियो' पाइपलाइन पर काम करता है। यह तकनीक इसे बातचीत के दौरान सिर हिलाने, बीच में बोलने या पॉज लेने जैसे मानवीय हाव-भाव दिखाने में सक्षम बनाती है। कंपनी के इंटरनल ट्रायल में 54 लोगों ने इस AI के साथ बातचीत की, जिसमें से 48% प्रतिभागियों को लगा कि वे किसी असली इंसान से बात कर रहे थे। 'Griffin-Lite' मॉडल ने NVIDIA के VideoFDB बेंचमार्क पर 3.83/5 का स्कोर हासिल किया है, जो इंसानी मानक 3.92 के बेहद करीब है।
BPO सेक्टर के लिए क्या हैं संकेत?
भले ही Tavus एक निजी स्टार्टअप है, लेकिन इसका भारतीय BPO और IT सर्विसेज सेक्टर पर असर पड़ना तय है। भारत दुनिया का एक बड़ा सर्विस हब है, जहाँ कस्टमर सपोर्ट और टेक्निकल असिस्टेंस के लिए लाखों लोग काम करते हैं। अगर AI इंसानी व्यवहार की नकल करने में पूरी तरह सफल हो जाता है, तो कंपनियां कॉस्ट कटिंग के लिए मानवीय स्टाफ की जगह इन वीडियो-आधारित AI एजेंट्स को प्राथमिकता दे सकती हैं। यह उन कंपनियों के लिए बड़ा रिस्क हो सकता है जो 'लेबर-बेस्ड रेवेन्यू मॉडल' पर टिकी हैं।
सिक्योरिटी और रेगुलेटरी रिस्क
इंसानों की तरह दिखने और बोलने वाला AI तकनीक 'डीपफेक' (Deepfake) जैसी गंभीर सुरक्षा चुनौतियों को भी बढ़ाता है। इससे डिजिटल वेरिफिकेशन और पहचान की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। आने वाले समय में रेगुलेटर्स 'प्रूफ ऑफ पर्सनहुड' (Proof of Personhood) जैसे प्रोटोकॉल पर जोर दे सकते हैं। फिलहाल Tavus इसे सीमित टेस्टर्स के लिए ही जारी कर रही है, क्योंकि कंपनी रिलीज से पहले सुरक्षा और एथिकल पहलुओं पर काम करना चाहती है।
