Tata Electronics ने अपने सेमीकंडक्टर और iPhone निर्माण विस्तार के लिए इक्विटी को बढ़ाकर ₹3,727 करोड़ कर दिया है। रेवेन्यू में **96%** की जबरदस्त उछाल के बावजूद, बड़े निवेश और प्रोजेक्ट्स की लागत के चलते कंपनी का नेट लॉस बढ़कर **₹1,611 करोड़** पर पहुंच गया है।
बड़े विस्तार की राह में बढ़ी लागत
Tata Electronics इस समय भारत के सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम को बनाने के लिए बड़े स्तर पर पूंजी लगा रही है। लंबे समय के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कंपनी ने अपनी इक्विटी को 3 गुना बढ़ाकर ₹3,727 करोड़ कर दिया है। यह फंड मुख्य रूप से iPhone प्रोडक्शन बढ़ाने और घरेलू सेमीकंडक्टर फाउंड्री बनाने में इस्तेमाल किया जा रहा है।
हालांकि, इस तेजी के पीछे का वित्तीय दबाव भी साफ दिख रहा है। मार्च 2026 तक कंपनी का ऑपरेटिंग इनकम 96% बढ़कर ₹1,29,902 करोड़ हो गया है। लेकिन, बड़े हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स सेटअप करने में आने वाले भारी डेप्रिसिएशन और ब्याज खर्च के कारण नेट लॉस ₹1,611 करोड़ तक पहुंच गया है, जो पिछले साल मात्र ₹70 करोड़ था।
कर्ज और निवेश का गणित
कंपनी ने अपने इन महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए टाटा सन्स से नई इक्विटी और कर्ज का सहारा लिया है। कंपनी का स्टैंडअलोन ग्रॉस डेट 71% बढ़कर ₹11,718 करोड़ हो गया है। इसके अलावा, कंपनी ने अपनी सब्सिडियरीज को ₹1,017 करोड़ के इंटर-कॉर्पोरेट लोन दिए हैं और सेमीकंडक्टर वेंचर्स के लिए ₹61,280 करोड़ की कॉर्पोरेट गारंटी दी है।
सेमीकंडक्टर पर फोकस
कंपनी का झुकाव अब सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन की तरफ ज्यादा है। Tata Semiconductor Manufacturing के लिए फंडिंग ₹1,501 करोड़ तक पहुंच गई है, जबकि Tata Semiconductor Assembly and Test के लिए यह आंकड़ा पिछले साल के ₹50 करोड़ से बढ़कर ₹954 करोड़ हो गया है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि कंपनी समय पर इन प्रोजेक्ट्स को कैसे पूरा करती है और बढ़ते कर्ज को कैसे मैनेज करती है।
