Tata Electronics: एक्सपोर्ट ₹1 लाख करोड़ के पार, फिर भी क्यों हुआ भारी घाटा?

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Tata Electronics: एक्सपोर्ट ₹1 लाख करोड़ के पार, फिर भी क्यों हुआ भारी घाटा?

Tata Electronics ने फाइनेंशियल ईयर 2026 में **₹1 लाख करोड़** के एक्सपोर्ट का बड़ा आंकड़ा छू लिया है। हालांकि, Apple के लिए तेजी से मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने के चक्कर में कंपनी को **₹1,611 करोड़** का नेट लॉस हुआ है।

ग्रोथ की रफ्तार और मुनाफे का पेंच

Tata Electronics का फाइनेंशियल ईयर 2026 का रिपोर्ट कार्ड मिला-जुला रहा है। कंपनी का कंसोलिडेटेड ऑपरेटिंग रेवेन्यू 96% बढ़कर ₹1,29,902 करोड़ पर पहुंच गया है, जो कंपनी के बड़े पैमाने पर विस्तार को दर्शाता है। लेकिन, इस आक्रामक ग्रोथ के साथ लागत का बोझ भी काफी बढ़ा है। कंपनी का नेट लॉस पिछले साल के ₹69 करोड़ से बढ़कर ₹1,611 करोड़ हो गया है। जानकारों का कहना है कि रुपये में 10% की गिरावट और विदेशी कंपोनेंट्स पर निर्भरता ने मुनाफे को प्रभावित किया है।

आयात पर निर्भरता का दर्द

निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता कंपनी का 'फॉरेन एक्सचेंज आउटगो' है। कंपनी का कुल विदेशी खर्च ₹1,29,641 करोड़ रहा, जो उनके कुल एक्सपोर्ट से भी ज्यादा है। सरल भाषा में कहें तो, भारत में iPhone असेंबल तो हो रहे हैं, लेकिन एक बड़ा हिस्सा अभी भी विदेशों से पुर्जे खरीदने में खर्च हो जाता है। वहीं, घरेलू बिक्री 46% बढ़कर ₹30,182 करोड़ रही है।

आगे की राह

तुलना करें तो Apple India का इसी अवधि में नेट प्रॉफिट ₹5,311 करोड़ रहा है। Tata Electronics के लिए अब असली चुनौती सिर्फ असेंबली तक सीमित न रहकर 'वैल्यू-एडेड मैन्युफैक्चरिंग' की ओर शिफ्ट होने की है। यदि कंपनी लोकल कंपोनेंट्स का इस्तेमाल बढ़ाती है और मैन्युफैक्चरिंग लाइनों का पूरा उपयोग करती है, तभी लंबी अवधि में मार्जिन में सुधार की उम्मीद की जा सकती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.