Tata Electronics ने अपने **₹27,000 करोड़** के असम सेमीकंडक्टर प्लांट में पहला क्लीन रूम तैयार कर पायलट प्रोडक्शन शुरू कर दिया है। कंपनी ने चीन पर निर्भरता घटाने के लिए यूरोप, जापान और दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ मजबूत सप्लाई चेन बनाई है।
असम में चिप क्रांति की शुरुआत
असम के जागीरोड में स्थित टाटा का सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग (OSAT) प्लांट अब अपने मील के पत्थर के करीब है। अक्टूबर 2026 की शुरुआत से ही यहाँ पायलट चिप प्रोडक्शन शुरू हो चुका है। जब यह प्लांट अपनी पूरी क्षमता पर काम करेगा, तो यहाँ रोजाना 4.8 करोड़ चिप्स का उत्पादन संभव होगा। यह टाटा ग्रुप का भारत में एक बड़ा इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम बनाने का महत्वाकांक्षी कदम है।
चीन से दूरी, ग्लोबल पार्टनरशिप पर जोर
ऑपरेशनल रिस्क को कम करने के लिए टाटा ने किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय अपनी सप्लाई चेन को डायवर्सिफाई किया है। सितंबर में हुए 'SEMICON India 2026' के दौरान कंपनी ने 16 ग्लोबल कंपनियों के साथ पार्टनरशिप की है। इसमें Nexperia, Besi, Fujifilm, Sumitomo और Sojitz जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इन साझेदारियों का मकसद कच्चे माल और मशीनरी को स्थानीय स्तर पर सुरक्षित करना है, ताकि जियो-पॉलिटिकल तनावों का असर काम पर न पड़े।
निवेशकों के लिए जरूरी बात
अगर आप टाटा ग्रुप के शेयरहोल्डर हैं, तो यह ध्यान रखना जरूरी है कि Tata Electronics अभी एक प्राइवेट सब्सिडियरी है और यह लिस्टेड कंपनी नहीं है। इसलिए इन खबरों का स्टॉक मार्केट पर कोई सीधा असर नहीं है। फिलहाल कंपनी बड़े निवेश दौर में है, जिसके चलते शुरुआती चरणों में नेट लॉस देखने को मिल रहा है, जो हाई-टेक इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए आम बात है।
आगे की राह
अभी कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती पायलट प्रोडक्शन से फुल कमर्शियल स्केल तक पहुंचने की है। कंपनी का लक्ष्य दिसंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच इस प्लांट का औपचारिक उद्घाटन करने का है। भविष्य में ग्लोबल क्लाइंट्स से मिलने वाले बड़े ऑर्डर और प्रोडक्शन एफिशिएंसी कंपनी की लंबी अवधि की सफलता तय करेंगे।
