Tata Communications के सितंबर तिमाही के नतीजे बेहद शानदार रहे हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट **86.2%** बढ़कर **₹341 करोड़** पर पहुंच गया है, जो मुख्य रूप से डेटा सर्विसेज में मजबूती के कारण है। हालांकि, निवेशकों को कंपनी पर लटके **₹7,844 करोड़** के सरकारी डिमांड नोटिस के जोखिम को भी ध्यान में रखना होगा।
Tata Communications ने 30 सितंबर, 2026 को समाप्त हुई तिमाही में दमदार प्रदर्शन किया है। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 86.2% की छलांग के साथ ₹341.03 करोड़ हो गया है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह ₹183.06 करोड़ था। कंपनी का रेवेन्यू भी 9.6% बढ़कर ₹6,687.89 करोड़ दर्ज किया गया।\n\nइस ग्रोथ के पीछे मुख्य ड्राइवर डेटा सर्विसेज सेगमेंट रहा, जिसका रेवेन्यू 12.2% बढ़कर ₹5,810.99 करोड़ पहुंच गया। कंपनी ने अब तक का अपना सबसे ऊंचा तिमाही EBITDA ₹1,422 करोड़ दर्ज किया है, जो पिछले साल के मुकाबले 21.2% अधिक है। EBITDA मार्जिन 202 बेसिस पॉइंट्स सुधरकर 21.3% पर आ गए हैं।\n\n### कॉर्पोरेट रीस्ट्रक्चरिंग और लीडरशिप\nनतीजों के साथ ही कंपनी ने अपने स्ट्रक्चर में बदलाव का एलान किया है। बोर्ड ने अपनी अमेरिकी फर्म Kaleyra की पूरी हिस्सेदारी को अपनी सहायक कंपनी Tata Communications (Netherlands) B.V. को ट्रांसफर करने की मंजूरी दी है। यह ट्रांजेक्शन लगभग $92.625 मिलियन का है। साथ ही, 1 नवंबर, 2026 से रिद्धि सूद कंपनी की नई सेक्रेटरी और कंप्लायंस ऑफिसर होंगी।\n\n### रेगुलेटरी चुनौतियां\nअच्छे नतीजों के बावजूद कंपनी पर ₹7,844.57 करोड़ का सरकारी विवाद भारी पड़ सकता है। यह मामला डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) के साथ लाइसेंस फीस को लेकर है। कंपनी ने साफ किया है कि ₹7,513.71 करोड़ की राशि फिलहाल 'कंटिजेंट लायबिलिटी' (आकस्मिक देनदारी) है। कंपनी का मानना है कि उसके लाइसेंस AGR विवाद के दायरे में नहीं आते। फिलहाल, मामला सुप्रीम कोर्ट और TDSAT में चल रहा है। निवेशकों के लिए इन कानूनी नतीजों पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा।
