बेंगलुरु की स्टार्टअप TakeMe2Space अब अपने ऑर्बिटल डेटा सेंटर प्रोजेक्ट के लिए Series A फंडिंग जुटाने की तैयारी में है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में कंपनी ने **₹5 करोड़** का रेवेन्यू हासिल किया, लेकिन धरती पर मौजूद क्लाउड सर्विसेज के मुकाबले इनकी लागत एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
बेंगलुरु स्थित टेक स्टार्टअप TakeMe2Space अंतरिक्ष में ही 'एज कंप्यूटिंग' (Edge Computing) इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही है। इनका मुख्य उद्देश्य सैटेलाइट से मिलने वाले भारी-भरकम डेटा को पृथ्वी पर भेजने के बजाय स्पेस में ही प्रोसेस करना है। इस तकनीक से एग्रीकल्चर, माइनिंग और डिफेंस जैसे सेक्टर को सीधे काम की जानकारी मिल सकेगी, जिससे डेटा ट्रांसमिशन का खर्च कम होगा।
लागत की बड़ी चुनौती
कंपनी के फाउंडर रोनक कुमार सामंतराय के सामने सबसे बड़ी चुनौती खर्चों को मैनेज करने की है। वर्तमान में स्पेस कंप्यूटिंग का खर्च $2 प्रति मिनट है, जबकि Amazon Web Services जैसे अर्थ-बेस्ड प्लेटफॉर्म पर यह महज $0.02 प्रति मिनट पड़ता है। अभी कंपनी की ऑपरेशनल लागत $10 मिलियन प्रति किलोवाट है, जिसे घटाकर 2029 तक $500,000 प्रति किलोवाट लाने का लक्ष्य रखा गया है।
भविष्य की योजनाएं
इस लागत को कम करने के लिए TakeMe2Space 1.3 किलोवाट की मॉड्यूलर यूनिट्स और प्रोप्राइटरी रेडिएशन शील्डिंग पर काम कर रही है। इससे सस्ते इंडस्ट्रियल-ग्रेड सिलिकॉन कंपोनेंट्स का उपयोग संभव हो सकेगा। कंपनी का इस साल दो सैटेलाइट लॉन्च करने का प्लान है और 2029 तक 1,500 किग्रा का सैटेलाइट तैनात करने का लक्ष्य है।
निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि यह सेक्टर कैपिटल-इंटेन्सिव है। अंतरिक्ष में हार्डवेयर अपग्रेड या मेंटेनेंस मुमकिन नहीं है, इसलिए इसमें 'एग्जीक्यूशन रिस्क' बहुत अधिक है। आने वाले समय में कंपनी के सैटेलाइट लॉन्च और फंड जुटाने की सफलता ही इसकी दिशा तय करेगी।
