टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के शेयर सोमवार को **6%** तक चढ़ गए। कंपनी ने ABB के साथ अपने मौजूदा मल्टी-ईयर कॉन्ट्रैक्ट को और बढ़ाया है, जिसके तहत TCS अब ABB के ग्लोबल नेटवर्क ऑपरेशन्स को संभालेगी। इस बड़े सौदे का असर Nifty IT इंडेक्स पर भी दिखा, जो **4%** ऊपर बंद हुआ।
TCS और ABB की पार्टनरशिप में नया अध्याय
भारतीय आईटी कंपनियों में सोमवार को शानदार तेजी देखी गई, जिसमें Nifty IT इंडेक्स 4% से ज्यादा की बढ़त के साथ बंद हुआ। इस उछाल की वजह इंडस्ट्री के बड़े खिलाड़ियों की ओर से आए पॉजिटिव नतीजे और नए डील्स की घोषणा रही। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) इस तेजी में सबसे आगे रही, जिसने ABB के साथ अपनी साझेदारी को और मजबूत करने का ऐलान किया है। ABB, जो इलेक्ट्रिफिकेशन और ऑटोमेशन की दुनिया की एक बड़ी कंपनी है, उसके ग्लोबल नेटवर्क ऑपरेशन्स को अब TCS संभालेगी।
TCS के शेयर में तूफानी तेजी
इस नए समझौते के बाद TCS के शेयरों में करीब 6% की जबरदस्त उछाल आई और यह ₹2,199.90 के स्तर पर पहुंच गया। इस डील के तहत, TCS अब सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर और एप्लीकेशन मैनेजमेंट से आगे बढ़कर ABB के दुनियाभर के नेटवर्क ऑपरेशन्स की जिम्मेदारी संभालेगी। इसके लिए एक इंटीग्रेटेड 'नेटवर्क-एज-ए-सर्विस' मॉडल का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसका मकसद ABB की डिजिटल और फिजिकल कनेक्टिविटी को मॉडर्नाइज और सिंपलीफाई करना है। इस मल्टी-ईयर डील की कुल वित्तीय कीमत का खुलासा तो नहीं किया गया है, लेकिन यह दोनों कंपनियों के बीच पिछले 20 सालों से चले आ रहे रिश्ते को और मजबूत करती है।
LTM का प्रदर्शन और मार्केट का माहौल
TCS के साथ-साथ LTM के शेयर में भी सोमवार को अच्छी तेजी देखी गई और यह 4.4% बढ़कर ₹4,215 पर पहुंच गया। इस तेजी की वजह कंपनी के हालिया जून 2026 क्वार्टर (Q1FY27) के नतीजे रहे, जिनमें प्रॉफिट मार्जिन में स्थिरता दिखी। LTM मैनेजमेंट का कहना है कि उनका 'फिट फॉर फ्यूचर' कॉस्ट-ऑप्टिमाइजेशन प्रोग्राम और 'ब्लूवर्क्स' AI इनिशिएटिव्स उनकी मौजूदा रणनीति के अहम हिस्से हैं। हालांकि, मिडिल ईस्ट में सप्लाई चेन से जुड़ी कुछ दिक्कतों के कारण प्रोजेक्ट्स में थोड़ी देरी हुई, लेकिन कंपनी को उम्मीद है कि फाइनेंशियल ईयर की दूसरी तिमाही से ऑपरेशनल स्पीड बढ़ेगी।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
निवेशकों के लिए यह देखना अहम होगा कि TCS और ABB जैसे बड़े डील्स से आने वाला रेवेन्यू ग्रोथ और मार्जिन में कितनी बढ़ोतरी होती है। सर्विस-आधारित कॉन्ट्रैक्ट्स से लगातार आमदनी तो होती है, लेकिन उन्हें मुनाफे में बदलने के लिए कुशल एग्जीक्यूशन की ज़रूरत होती है। इसके अलावा, आईटी सेक्टर अभी भी क्लाइंट्स के ग्लोबल खर्च के पैटर्न पर काफी निर्भर करता है। डील के एग्जीक्यूशन की टाइमलाइन, हार्डवेयर सप्लाई चेन की दिक्कतों का समाधान और फाइनेंशियल व टेक्नोलॉजी सेक्टर्स में मांग को लेकर मैनेजमेंट की कमेंट्री, यह तय करेगी कि यह सेक्टर-वाइड रैली आगे कितनी बनी रहती है।
