टाटा ग्रुप में आया बड़ा बदलाव
टाटा ग्रुप की अपनी आईटी कंपनी TCS पर निर्भरता कम होती दिख रही है। जून 2026 तक, सभी लिस्टेड टाटा कंपनियों की कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन में TCS का हिस्सा सिर्फ 30.8% रह गया है। यह मार्च 2020 के मुकाबले एक बड़ी गिरावट है, जब TCS की हिस्सेदारी लगभग 75% थी। यह ग्रुप के वैल्यूएशन ढांचे में एक बड़ा बदलाव दिखाता है, क्योंकि अब ग्रुप की गैर-आईटी कंपनियां नई ऊंचाइयों पर पहुंच रही हैं।
क्यों गिर रहा है TCS का शेयर?
बाजार के आंकड़े बताते हैं कि TCS और बाकी टाटा कंपनियों के बीच बड़ा अंतर आ गया है। जहां टाटा ग्रुप की बाकी कंपनियों ने मैक्रो इकोनॉमिक उतार-चढ़ाव का सामना किया है, वहीं TCS के मार्केट वैल्यू में भारी कमी आई है। 2026 की शुरुआत में जहां TCS का वैल्यूएशन करीब ₹11.6 लाख करोड़ था, वह घटकर ₹8 लाख करोड़ से नीचे आ गया है। यह गिरावट ग्रुप के संयुक्त नुकसान से कहीं ज्यादा है। इस बड़ी गिरावट की मुख्य वजह ग्लोबल आईटी सर्विसेज सेक्टर पर बढ़ता दबाव है। कंपनियों का खर्च कम होना, ग्राहकों का निर्णय लेने में देरी और AI पर आधारित नए मॉडल्स को अपनाने की चुनौती, ये सब TCS के लिए मुश्किलें खड़ी कर रही हैं। निवेशक TCS के AI आर्किटेक्चर, जैसे HyperVault डेटा सेंटर, में किए गए बड़े निवेश को मार्जिन पर पड़ने वाले दबाव और ग्राहकों के 'वेट एंड सी' (wait and see) रवैये के सामने तौल रहे हैं।
तकनीकी संकेत और कमजोर मोमेंटम
तकनीकी तौर पर, TCS का शेयर सपोर्ट लेवल बनाए रखने में संघर्ष कर रहा है और जून 2026 में 52-हफ्ते के निचले स्तरों को छू रहा है। स्टॉक में तेज गिरावट और फिर थोड़ी रिकवरी के बाद फिर से कमजोरी देखी जा रही है। एनालिस्ट्स का कहना है कि RSI (Relative Strength Index) का कमजोर होना और शेयर का प्रमुख मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड करना, संस्थागत निवेशकों के घटते विश्वास का संकेत है। वहीं, Trent या Titan जैसी कंपनियों के विपरीत, जो लचीलापन दिखा रही हैं, TCS ग्लोबल आईटी खर्च के चक्र पर निर्भर है, जिसे फिलहाल ऐतिहासिक वैल्यूएशन प्रीमियम को सही ठहराने के लिए पर्याप्त तेजी नहीं दिख रही है। GenAI स्पेस में प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए कंपनी द्वारा किए जा रहे भारी पूंजीगत व्यय (capital expenditure) से मार्जिन में और कमी का खतरा भी बढ़ रहा है।
आगे क्या? ब्रोकरेज की मिली-जुली राय
कमजोर अल्पकालिक तकनीकी ट्रेंड के बावजूद, ब्रोकरेज फर्मों की राय बंटी हुई है। कुछ एनालिस्ट्स लॉन्ग-टर्म AI डील पाइपलाइन और डिविडेंड (Dividend) पर भरोसा जताते हुए 'बाय' रेटिंग दे रहे हैं, जबकि अन्य मौजूदा सायकल को देखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। बाजार अब आने वाली इन्वेस्टर मीट्स का इंतजार कर रहा है, ताकि यह समझा जा सके कि TCS अपने नए AI-संचालित सर्विस ऑफर्स से सायक्लिकल मंदी को कैसे दूर करेगा। वर्तमान में, स्टॉक अपने ऐतिहासिक औसत से काफी कम वैल्यूएशन मल्टीपल्स पर ट्रेड कर रहा है। ऐसे में, यह बहस जारी है कि कंपनी स्ट्रक्चरली अंडरवैल्यूड है या फिर पोस्ट-आउटसोर्सिंग ग्रोथ के माहौल में उसे स्थायी रूप से कम वैल्यूएशन पर रेट किया जा रहा है।
