Swift ने 17 बड़े वैश्विक बैंकों के साथ मिलकर ब्लॉकचेन-आधारित लेजर पायलट लॉन्च किया है। इसका मकसद टोकनाइज्ड डिपॉजिट का इस्तेमाल करके 24/7 क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजैक्शन को संभव बनाना है, ताकि अंतरराष्ट्रीय भुगतानों को ज्यादा कुशल बनाया जा सके।
24 घंटे पेमेंट की सुविधा
Swift, जो कि एक ग्लोबल फाइनेंशियल मैसेजिंग नेटवर्क है, ने अपने ब्लॉकचेन-आधारित लेजर को डेवलपमेंट स्टेज से एक कंट्रोल्ड, लाइव पायलट फेज में ले जाया है। अब छह महाद्वीपों के 17 बड़े फाइनेंशियल संस्थान इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके असलियत में क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजैक्शन कर रहे हैं। इस पायलट में HSBC, Citi, BNP Paribas, DBS, Standard Chartered, UBS, Wells Fargo, ANZ, MUFG Bank और Lloyds Bank जैसे अंतरराष्ट्रीय बैंक शामिल हैं।
इस प्लेटफॉर्म का एक मुख्य लक्ष्य पारंपरिक बैंकिंग घंटों की सीमाओं को खत्म करना है, जो अक्सर अंतरराष्ट्रीय फंड ट्रांसफर में देरी का कारण बनती हैं। ब्लॉकचेन लेजर का उपयोग करके, Swift 24/7 पेमेंट की क्षमता का समर्थन करना चाहता है, जिससे वीकेंड और रात के समय भी ट्रांजैक्शन हो सकेंगे। हालांकि लेजर वैल्यू के मूवमेंट को आसान बनाता है, फाइनल सेटलमेंट मौजूदा, आजमाए हुए पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर पर ही निर्भर करेगा। इससे यह सुनिश्चित होता है कि नई तकनीक स्थापित बैंकिंग प्रणालियों के ऊपर एक लेयर के तौर पर काम करे, न कि एक स्टैंडअलोन रिप्लेसमेंट के रूप में।
टोकनाइज्ड डिपॉजिट को समझना
यह प्लेटफॉर्म टोकनाइज्ड डिपॉजिट पर निर्भर करता है, जो ब्लॉकचेन पर मैनेज किए जाने वाले स्टैंडर्ड बैंक डिपॉजिट के डिजिटल वर्जन हैं। चूंकि ये टोकन जारी करने वाले बैंकों की सीधी देनदारियां दर्शाते हैं, इसलिए ये क्रिप्टोकरेंसी या अस्थिर डिजिटल एसेट्स से अलग तरह से काम करते हैं। निवेशकों और फाइनेंशियल ऑब्जर्वर्स के लिए यह अंतर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह संपत्तियों को पारंपरिक, अत्यधिक रेगुलेटेड बैंकिंग फ्रेमवर्क के भीतर रखता है। यह तकनीक संस्थानों के बीच स्वामित्व को ट्रैक करने और ट्रांसफर करने के तरीके को अपडेट करती है, जिसका उद्देश्य प्रशासनिक बाधाओं को कम करना और बैंकों को सीमाओं के पार अपनी लिक्विडिटी को बेहतर ढंग से मैनेज करने में मदद करना है।
संदर्भ और भविष्य के संकेत
Swift ने बताया है कि इस प्लेटफॉर्म को नौ महीनों की अवधि में विकसित किया गया है। इसे अपने मौजूदा नेटवर्क के विस्तार के तौर पर देखा जा रहा है, जो पहले से ही लगभग 75% भुगतानों को मिनटों में लाभार्थियों तक पहुंचाता है। उद्योग और Swift के लिए मुख्य चुनौती इस 17-बैंक पायलट को एक व्यापक, वैश्विक कार्यान्वयन तक बढ़ाना होगी। बैंकिंग और फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशक इस बात पर नज़र रख सकते हैं कि क्या यह पायलट भाग लेने वाले बैंकों के लिए परिचालन लागत को कम करता है या उन्हें अपने कॉर्पोरेट और संस्थागत ग्राहकों को तेज, अधिक लचीली सेवाएं प्रदान करके अधिक ट्रांजैक्शन वॉल्यूम हासिल करने की अनुमति देता है। परियोजना के अगले कदम संभवतः विभिन्न नियामक वातावरणों के तहत इन ट्रांजैक्शन के प्रदर्शन का मूल्यांकन करना और उसके वैश्विक सदस्य नेटवर्क द्वारा उपयोग किए जाने वाले विविध कोर बैंकिंग सिस्टम में लेजर को एकीकृत करने में आसानी का आकलन करना होगा।
