स्वदेशी जागरण मंच (SJM) ने केंद्र सरकार से Elon Musk की कंपनी Starlink को भारत में लाइसेंस न देने की औपचारिक मांग की है। राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यापारिक चिंताओं का हवाला देते हुए इस मांग ने टेलीकॉम सेक्टर में नई नियामक अनिश्चितता (Regulatory Uncertainty) पैदा कर दी है, जहां पहले से ही Bharti Airtel और Reliance Jio के बीच स्पेक्ट्रम को लेकर कड़ी प्रतिस्पर्धा है।
सुरक्षा का मुद्दा और नीतिगत पेच
13 अक्टूबर, 2026 को स्वदेशी जागरण मंच ने सार्वजनिक रूप से सरकार से आग्रह किया कि वे Starlink को भारत में ऑपरेट करने की अनुमति न दें। मंच का तर्क है कि सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवाएं राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा जोखिम हो सकती हैं। संगठन का मानना है कि इस तकनीक के कारण सुरक्षा इमरजेंसी के दौरान डेटा ट्रैफिक पर निगरानी रखना या इंटरनेट शटडाउन लागू करना मुश्किल हो सकता है।
मस्क बनाम स्थानीय दावेदार
यह विवाद उस समय और गहरा गया है जब Elon Musk ने पहले भी स्थानीय 'ओलिगार्क' पर मार्केट डोमिनेंस बनाए रखने के लिए लाइसेंसिंग प्रक्रिया में देरी करने का आरोप लगाया था। हालांकि, भारत सरकार का स्पष्ट रुख है कि उनकी लाइसेंसिंग और सुरक्षा जांच की प्रक्रिया पूरी तरह से वस्तुनिष्ठ (Objective) और बिना किसी भेदभाव के सभी आवेदकों के लिए समान है।
टेलीकॉम दिग्गजों पर असर
हालांकि Starlink भारतीय शेयर बाजारों में लिस्टेड नहीं है, लेकिन यह घटनाक्रम उन निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है जो टेलीकॉम सेक्टर पर नजर रखते हैं। Reliance Industries (Reliance Jio) और Bharti Airtel जैसी दिग्गज कंपनियां पहले से ही अपनी सैटेलाइट कनेक्टिविटी सेवाओं को मजबूत करने के लिए लाइसेंस हासिल करने में जुटी हैं।
अब सबकी निगाहें Ministry of Communications पर टिकी हैं। सैटेलाइट स्पेक्ट्रम पर सरकार की आने वाली नीति ही यह तय करेगी कि विदेशी टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर्स और घरेलू टेलीकॉम कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा का भविष्य क्या होगा। यह फैसला भविष्य में Eutelsat OneWeb जैसे अन्य वैश्विक खिलाड़ियों के लिए भी एक मिसाल (Precedent) साबित होगा।
