सुरत पुलिस ने 18 साल के रोहित शाक्य को गिरफ्तार किया है, जिसने कथित तौर पर फर्जी बैंकिंग ऐप बनाकर बेचे। इस जालसाजी में 121 खतरनाक ऐप्स का इस्तेमाल हुआ और देशभर के लोगों को **₹64 करोड़** से ज़्यादा का चूना लगा। यह मामला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सब्सक्रिप्शन-आधारित सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके खुदरा बैंकिंग उपयोगकर्ताओं को निशाना बनाने वाले साइबर अपराधियों के बढ़ते खतरे को उजागर करता है।
Detailed Coverage
मास्टरमाइंड गिरफ्तार, खुला 121 ऐप्स का खेल!
सुरत पुलिस ने एक ऐसे 18 साल के युवक, रोहित विरेंद्रसिंह शाक्य को गिरफ्तार किया है, जो देशभर में चल रहे एक बड़े साइबर फ्रॉड रैकेट का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह हाई स्कूल ड्रॉपआउट युवक अपनी कोडिंग स्किल्स का इस्तेमाल करके साइबर अपराधियों के लिए एक ऐसा सिस्टम तैयार करता था, जिससे वे आसानी से लोगों को ठग सकें। उसने कई बड़े बैंकों जैसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के साथ-साथ सरकारी प्लेटफॉर्म्स की नकल करने वाले फर्जी मोबाइल ऐप बनाए।
सब्सक्रिप्शन पर बिकते थे ये खतरनाक ऐप्स!
जांच में पता चला है कि आरोपी ने दो तरह के ऐप सिस्टम बनाए थे। पहला ऐप आम लोगों को इंस्टॉल करने के लिए दिया जाता था, जबकि दूसरा ऐप साइबर अपराधियों को रियल-टाइम में पीड़ित के बैंक अकाउंट की जानकारी और वन-टाइम पासवर्ड (OTP) तक पहुंचने की सुविधा देता था। खास बात यह है कि इस सॉफ्टवेयर को सब्सक्रिप्शन मॉडल पर बेचा जा रहा था, जिसमें हर महीने ₹15,000 का चार्ज लिया जाता था।
₹64 करोड़ का चूना, 21,000 से ज़्यादा डिवाइस संक्रमित!
सुरत के एक निवासी की ₹5 लाख की धोखाधड़ी की शिकायत के बाद पुलिस हरकत में आई। डिजिटल फोरेंसिक जांच में पता चला कि आरोपी 121 से ज़्यादा फर्जी ऐप्स के पीछे था, जो 21,000 से ज़्यादा डिवाइस पर इंस्टॉल किए गए थे। इन खतरनाक ऐप्स के ज़रिए 54,000 से ज़्यादा ट्रांजैक्शन हुए, जिससे कुल ₹64.38 करोड़ की धोखाधड़ी सामने आई है। RTO चालान जैसे दिखने वाले ऐप्स इस नेटवर्क में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किए गए।
आगे की जांच जारी
कानपुर, उत्तर प्रदेश से गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी के पास से कई मोबाइल फोन और लैपटॉप जब्त किए हैं। अब पुलिस इस पूरे नेटवर्क का जाल बिछाने, उन सिंडिकेट्स का पता लगाने, जिन्होंने ये सॉफ्टवेयर खरीदे और इस्तेमाल किए, और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस ऑपरेशन में कोई और भी शामिल था। सुरक्षा एजेंसियां ग्राहकों को हमेशा अनजान सोर्स से ऐप डाउनलोड करने से बचने और वेरिफाइड प्लेटफॉर्म्स का ही इस्तेमाल करने की सलाह दे रही हैं।
