Super Micro Computer के एक पूर्व कॉन्ट्रैक्टर ने अमेरिका की फेडरल कोर्ट में **$2.5 अरब** के अवैध AI सर्वर एक्सपोर्ट घोटाले में अपना जुर्म कबूल कर लिया है। कंपनी पर कोई आपराधिक आरोप नहीं है, लेकिन इस घटना ने टेक सप्लाई चेन के रेगुलेटरी रिस्क को उजागर कर दिया है।
इस मामले में Ting-Wei 'Willy' Sun, जो Super Micro Computer से जुड़े एक पूर्व कॉन्ट्रैक्टर थे, ने 9 अक्टूबर, 2026 को मैनहट्टन फेडरल कोर्ट में अपना अपराध स्वीकार किया। यह कानूनी मामला हाई-परफॉर्मेंस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सर्वर्स को चोरी-छिपे चीन भेजने की एक सोची-समझी साजिश से जुड़ा है, जो अमेरिकी एक्सपोर्ट नियमों के दायरे में आते थे।
क्या था पूरा घोटाला?
सरकारी वकीलों के मुताबिक, साल 2024 से 2025 के बीच इन पाबंदियों को दरकिनार करने के लिए दक्षिण-पूर्व एशियाई बिचौलियों का सहारा लिया गया ताकि हार्डवेयर की असली मंजिल को छिपाया जा सके। इन सर्वर्स में Nvidia के हाई-पावर ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स लगे थे, जिनके चीन में मिलिट्री या साइबर सिक्योरिटी कामों में इस्तेमाल पर अमेरिका के Department of Commerce ने सख्त रोक लगा रखी है।
कंपनी का पक्ष
Super Micro Computer ने स्पष्ट किया है कि वह इस फेडरल इंडिक्टमेंट (आरोपपत्र) में प्रतिवादी नहीं है। कंपनी बोर्ड की अगुवाई में हुई आंतरिक जांच में यह पाया गया कि सीनियर मैनेजमेंट का इस साजिश में कोई हाथ नहीं था। जिन अन्य लोगों—Yih-Shyan 'Wally' Liaw और Ruei-Tsang 'Steven' Chang—पर आरोप लगे थे, वे अब कंपनी से जुड़े हुए नहीं हैं।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
भले ही कंपनी पर कोई सीधा कानूनी मामला न हो, लेकिन निवेशकों के लिए चिंता का विषय 'रेगुलेटरी और कंप्लायंस' का बढ़ता दबाव है। वाशिंगटन जिस तरह से ट्रेड बैरियर और एक्सपोर्ट पर निगरानी बढ़ा रहा है, उससे टेक सेक्टर की ऑपरेशनल लागत बढ़ने का खतरा है। ऐसे मामलों से अक्सर सख्त ऑडिट और ट्रांसपेरेंसी की शर्तें लागू होती हैं, जो भविष्य में कंपनी के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं।
