Suind Drone Tech: ₹20.5 करोड़ की फंडिंग, अब एग्रीकल्चर और सर्विलांस पर बड़ा दांव

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Suind Drone Tech: ₹20.5 करोड़ की फंडिंग, अब एग्रीकल्चर और सर्विलांस पर बड़ा दांव

Suind, जो कि एक बेंगलुरु-आधारित ड्रोन बनाने वाली कंपनी है, ने **₹20.5 करोड़** की सीड फंडिंग जुटाई है। इस राउंड का नेतृत्व Transition VC और IIMA Ventures ने किया। इस पैसे का इस्तेमाल कंपनी अपने 'Bumblebee' एग्रीकल्चर स्प्रेइंग ड्रोन के बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन और 'Wasp' सर्विलांस प्लेटफॉर्म के डेवलपमेंट के लिए करेगी।

सुईंड का बड़ा कदम: ₹20.5 करोड़ की सीड फंडिंग!

बेंगलुरु की स्टार्टअप Suind, जो ऑटोनॉमस ड्रोन टेक्नोलॉजी में माहिर है, ने सफलतापूर्वक ₹20.5 करोड़ की सीड फंडिंग राउंड पूरा कर लिया है। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व Transition VC ने किया, जिसमें IIMA Ventures जैसे बड़े निवेशकों ने भी हिस्सा लिया।

टेक्नोलॉजी और प्रोडक्शन का विस्तार

साल 2020 में कुणाल श्रीवास्तव और केविन क्लेबर द्वारा स्थापित Suind, अपनी ऑनबोर्ड कंप्यूटर विजन और 3D परसेप्शन टेक्नोलॉजी के साथ बाकी कंपनियों से अलग पहचान बना रही है। जहां कई ड्रोन GPS पर निर्भर करते हैं, वहीं Suind के सिस्टम खास तौर पर मुश्किल और कम ऊंचाई वाले इलाकों में बिना किसी रुकावट के उड़ान भरने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। यह ऑटोनॉमस क्षमता ही इनकी खासियत है, जिससे उड़ानों के दौरान इंसानी निगरानी की ज़रूरत कम हो जाती है।

'Bumblebee' और 'Wasp': भविष्य की ओर...

कंपनी का मुख्य प्रोडक्ट 'Bumblebee' है, जो DGCA द्वारा सर्टिफाइड 10-लीटर क्षमता वाला एग्रीकल्चर स्प्रेइंग ड्रोन है। इसे ऊँची फसलों और उबड़-खाबड़ ज़मीन जैसे मुश्किल इलाकों के लिए तैयार किया गया है। यह ड्रोन अपने आप बाधाओं को पहचान कर ज़मीन के अनुसार उड़ता है, जिससे खेती में केमिकल के छिड़काव में एकरूपता आती है। भविष्य में, 'Wasp' प्लेटफॉर्म के ज़रिए कंपनी अपनी टेक्नोलॉजी को इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्पेक्शन, इंडस्ट्रियल मॉनिटरिंग और सिक्योरिटी जैसी सेवाओं में भी इस्तेमाल करने की योजना बना रही है।

बाज़ार और आगे की चुनौतियाँ

भारत सरकार के ड्रोन-आधारित खेती को बढ़ावा देने के कारण देश में एग्रीकल्चर ड्रोन का बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहा है। Suind ने अपने एग्रीकल्चर स्प्रेयर के लिए DGCA टाइप सर्टिफिकेशन तो हासिल कर लिया है, लेकिन अब कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रोडक्शन कैपेसिटी को बढ़ाकर बाज़ार की मांग को पूरा करना है। अगले 12 से 24 महीनों में कंपनी रिसर्च एंड डेवलपमेंट से आगे बढ़कर कमर्शियल लॉन्च की तरफ कदम बढ़ाएगी। निवेशकों की नज़र अब कंपनी के प्रोडक्शन माइलस्टोन, 'Bumblebee' मॉडल की बिक्री और 'Wasp' प्लेटफॉर्म की व्यावहारिकता पर रहेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.