सूरत में स्थित Suchi Semicon ने अपने कमर्शियल ऑपरेशंस शुरू कर दिए हैं। फिलहाल यह प्लांट हर दिन **3,00,000** चिप्स की पैकेजिंग और टेस्टिंग कर रहा है। कंपनी का लक्ष्य अगले तीन सालों में इस क्षमता को **30 लाख** चिप्स प्रतिदिन तक ले जाने का है।
कमर्शियल प्रोडक्शन की शुरुआत
सूरत, गुजरात में स्थित Suchi Semicon का सेमीकंडक्टर पैकेजिंग और टेस्टिंग प्लांट अब पूरी तरह से ऑपरेशनल हो गया है। 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' (India Semiconductor Mission) के तहत अप्रूव होने वाला यह पहला OSAT यूनिट है, जो प्रोजेक्ट अप्रूवल से सीधे कमर्शियल स्टेज तक पहुंच गया है।
क्षमता विस्तार का प्लान
कंपनी अपनी क्षमता को 10 गुना बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। ऑटोमोटिव, इंडस्ट्रियल और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की जरूरतों को पूरा करने के लिए कंपनी यहाँ SOIC और QFN जैसी एडवांस पैकेजिंग तकनीकें लाएगी।
निवेश और रणनीतिक भागीदारी
इस प्रोजेक्ट में कुल US$ 10 करोड़ का निवेश किया गया है, जिसमें सरकार की ओर से ₹868 करोड़ की सब्सिडी भी शामिल है। ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के साथ तालमेल बिठाने के लिए कंपनी ने जापान की ROHM Semiconductor के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का करार किया है।
रिस्क और चुनौतियां
निवेशकों को यह ध्यान में रखना चाहिए कि सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में 'Execution Risk' काफी ज्यादा होता है। किसी भी नई सुविधा को ग्लोबल चिप कंपनियों से क्वालिटी सर्टिफिकेशन मिलने में 6 महीने से 1 साल तक का समय लग सकता है। कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ पूरी तरह से इन क्लाइंट्स की मंजूरी और प्लांट के बेहतर यूटिलाइजेशन (Capacity Utilisation) पर निर्भर करेगी। यदि ग्लोबल फर्म्स से मंजूरी मिलने में देरी होती है, तो कंपनी के 30 लाख चिप्स प्रति दिन के लक्ष्य पर असर पड़ सकता है।
