Submer Group का बड़ा दांव: मध्य प्रदेश में ₹13,000 करोड़ का निवेश, बनाएगी खास डेटा सेंटर कूलिंग प्लांट

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AuthorNeha Patil|Published at:
Submer Group का बड़ा दांव: मध्य प्रदेश में ₹13,000 करोड़ का निवेश, बनाएगी खास डेटा सेंटर कूलिंग प्लांट

स्पेनिश टेक कंपनी Submer Group मध्य प्रदेश में डेटा सेंटर कूलिंग और मैन्युफैक्चरिंग की सुविधाएँ स्थापित करने के लिए ₹2 बिलियन (लगभग ₹13,000 करोड़) का भारी निवेश करने जा रही है। इस प्रोजेक्ट से करीब 5,000 नई नौकरियां पैदा होंगी और राज्य हाई-डेंसिटी डेटा सेंटर टेक्नोलॉजी का हब बनेगा।

मध्य प्रदेश बनेगा डेटा सेंटर का गढ़!

स्पेन की जानी-मानी टेक कंपनी Submer Group ने मध्य प्रदेश में अपनी जड़ें जमाने का बड़ा फैसला किया है। कंपनी राज्य में डेटा सेंटर कूलिंग और हाई-डेंसिटी डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए $2 बिलियन (लगभग ₹13,000 करोड़) का जबरदस्त निवेश करेगी। यह घोषणा MP Tech Growth Conclave 3.0 में हुई, जहाँ कंपनी ने अपनी भविष्य की योजनाओं का खुलासा किया। इस सुविधा को एशिया भर में कूलिंग टेक्नोलॉजी एक्सपोर्ट करने के बेस के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा।

हाई-टेक कूलिंग और ग्रीन एनर्जी पर फोकस

Submer खास तौर पर डेटा सेंटरों के लिए एडवांस लिक्विड कूलिंग टेक्नोलॉजी में माहिर है। आज के दौर में, जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और हाई-परफॉरमेंस कंप्यूटिंग की मांग बढ़ रही है, ऐसी एफिशिएंट कूलिंग की जरूरत भी बढ़ गई है। भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाकर, Submer ग्रुप पुरानी कूलिंग तकनीकों से हटकर ऐसे सिस्टम लाना चाहता है जो पानी और बिजली दोनों की कम खपत करें। कंपनी के लीडर्स का कहना है कि राज्य सरकार ने प्रोजेक्ट के पहले फेज के लिए 15 एकड़ जमीन भी आवंटित कर दी है। खास बात यह है कि भारत में कंपनी को नई और एफिशिएंट कूलिंग टेक्नोलॉजी लाने में आसानी होगी, क्योंकि यहाँ पुराने सिस्टम को बदलने की झंझट नहीं होगी।

5,000 नई नौकरियों का वादा

सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने तक ही बात सीमित नहीं है। Submer ग्रुप डेटा सेंटर ऑपरेशन्स से जुड़े मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और प्लंबिंग (MEP) फील्ड में वर्कर्स को ट्रेनिंग देने के लिए खास प्रोग्राम भी शुरू करने की योजना बना रहा है। कंपनी को उम्मीद है कि इस प्रोजेक्ट से रीजन में करीब 5,000 नई नौकरियां पैदा होंगी। इन पहलों का मकसद नई पीढ़ी के डेटा सेंटरों के लिए जरूरी टेक्निकल स्किल्स वाले वर्कफोर्स को तैयार करना है, जिनके लिए खास मेंटेनेंस और इंजीनियरिंग स्किल्स की ज़रूरत होती है।

निवेश की राह में क्या हैं चुनौतियां?

यह निवेश भारत के सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर सपोर्ट इकोसिस्टम के लिए एक बड़ा कदम है, लेकिन इतने बड़े कैपिटल एक्सपेंडिचर प्रोजेक्ट की सफलता कई बातों पर निर्भर करती है। इन्वेस्टर्स इस बात पर नज़र रखेंगे कि कंपनी कितनी तेजी से अपनी फैसिलिटी सेटअप करती है और प्रोडक्शन कैपेसिटी को फुल करती है। चूँकि कंपनी इन कूलिंग सिस्टम्स को अन्य एशियाई बाजारों में एक्सपोर्ट करने का इरादा रखती है, इसलिए ग्लोबल डिमांड और भारत में मैन्युफैक्चरिंग की लागत कितनी कॉम्पिटिटिव है, यह देखना अहम होगा।

सभी बड़े इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स की तरह, प्लांट के कंप्लीशन की टाइमलाइन, जरूरी एनवायर्नमेंटल और ऑपरेशनल अप्रूवल्स, और लोकल सप्लाई चेन्स के साथ इंटीग्रेशन, यह तय करेगा कि कंपनी अपनी ऑपरेशन्स को कितनी जल्दी बढ़ा पाएगी। इन्वेस्टर्स कंपनी द्वारा इस $2 बिलियन के कमिटमेंट को कैसे फंड किया जा रहा है और आने वाले सालों में प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट के टारगेट पूरे होते हैं या नहीं, इस पर भी अपडेट्स की उम्मीद कर सकते हैं।

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