सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 को मिलेगा बूस्ट! लॉन्च हुआ 'सेमीकंडक्टर कंसोर्टियम'

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 को मिलेगा बूस्ट! लॉन्च हुआ 'सेमीकंडक्टर कंसोर्टियम'

भारत सरकार के ₹1.27 लाख करोड़ के इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 को सपोर्ट देने के लिए स्टार्टअप पॉलिसी फोरम ने 'द सेमीकंडक्टर कंसोर्टियम' लॉन्च किया है। यह नया प्लेटफॉर्म स्टार्टअप्स, निवेशकों और बड़ी टेक कंपनियों को एक साथ लाएगा ताकि पॉलिसी बनाने और इकोसिस्टम को तेजी से बढ़ाने में मदद मिल सके।

क्या है 'द सेमीकंडक्टर कंसोर्टियम'?

स्टार्टअप पॉलिसी फोरम (SPF) ने भारत के ₹1.27 लाख करोड़ के इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 को लागू करने के लिए एक नया इंडस्ट्री प्लेटफॉर्म 'द सेमीकंडक्टर कंसोर्टियम' लॉन्च किया है। यह एक ऐसा मंच है जहाँ सेमीकंडक्टर स्टार्टअप्स, वेंचर कैपिटल फर्म्स और बड़ी टेक कंपनियाँ मिलकर सरकार की सेमीकंडक्टर पॉलिसी के लिए इनपुट देंगी।

इस कंसोर्टियम को 'सेमीकन बातचीत' नाम के एक राउंडटेबल डिस्कशन में लॉन्च किया गया। इस मीटिंग की अध्यक्षता इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सेक्रेटरी एस. कृष्णन ने की। इसमें Agnit Semiconductors और Incore Semiconductors जैसे स्टार्टअप्स के साथ-साथ Intel, AMD और Ericsson जैसी ग्लोबल टेक कंपनियों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। इसका मुख्य मकसद सरकार और प्राइवेट सेक्टर के बीच बातचीत का एक स्ट्रक्चर्ड चैनल बनाना है, ताकि पॉलिसी, इंडस्ट्री की जरूरतों के हिसाब से बनी रहे।

सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को कैसे मिलेगा सपोर्ट?

यूनियन कैबिनेट से 15 जुलाई 2026 को हरी झंडी मिलने वाला ISM 2.0, भारत में चिप डिज़ाइन, मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी, ATMP (असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग) यूनिट्स, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) और ज़रूरी केमिकल्स और मटेरियल के प्रोडक्शन के लिए एक मजबूत डोमेस्टिक इकोसिस्टम तैयार करना चाहता है। नया कंसोर्टियम इन सभी पिलर्स को लागू करने में मदद करेगा, खासकर बढ़ते स्टार्टअप्स के सामने आने वाली चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करेगा।

मीटिंग में शामिल लोगों ने सेक्टर की सफलता के लिए कुछ ज़रूरी बातों पर ज़ोर दिया। इनमें पेशेंट कैपिटल (धैर्यवान पूंजी) की ज़रूरत, शेयर्ड इंफ्रास्ट्रक्चर तक बेहतर पहुँच, स्किल्ड टैलेंट डेवलपमेंट और सरकारी को-इन्वेस्टमेंट मॉडल के लिए स्पष्ट ऑपरेशनल गाइडलाइन्स शामिल हैं। लगातार बातचीत के ज़रिए, यह कंसोर्टियम सरकार को डेटा-आधारित पॉलिसी सुझाव देगा।

निवेशकों के लिए क्या है खास?

निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि 'द सेमीकंडक्टर कंसोर्टियम' एक इंडस्ट्री पॉलिसी एलायंस है, कोई पब्लिकली ट्रेडेड कंपनी नहीं। इसलिए, इसका कोई शेयर प्राइस या एक्सचेंज फाइलिंग नहीं है। हालाँकि, यह जिस मिशन (ISM 2.0) को सपोर्ट करता है, वह भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

इस सेक्टर में निवेश करने वाले निवेशकों को सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री की प्रकृति को समझना चाहिए। इन प्रोजेक्ट्स में आमतौर पर भारी कैपिटल स्पेंडिंग (कैपेक्स) की ज़रूरत होती है, जो शॉर्ट-टर्म कैश फ्लो पर दबाव डाल सकती है। इसके अलावा, यह इंडस्ट्री साइक्लिकल (चक्रीय) है, यानी कंपनियाँ ग्लोबल डिमांड में उतार-चढ़ाव और स्थापित ग्लोबल प्लेयर्स से कड़ी प्रतिस्पर्धा के प्रति संवेदनशील होती हैं। भले ही ISM 2.0 के तहत सरकारी इंसेंटिव इन बाधाओं को कम करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, लेकिन सफलता काफी हद तक प्रोजेक्ट्स के असल एग्जीक्यूशन, इंफ्रास्ट्रक्चर के टाइमली रोलआउट और डोमेस्टिक फर्म्स की कमर्शियल स्केल हासिल करने की क्षमता पर निर्भर करेगी।

मार्केट पार्टिसिपेंट्स के लिए अगली महत्वपूर्ण बातें ISM 2.0 के लिए स्पेसिफिक ऑपरेशनल गाइडलाइन्स का रिलीज़ होना और सरकार द्वारा फैब्रिकेशन, टेस्टिंग और डिज़ाइन में प्रोजेक्ट्स के लिए सपोर्ट अप्रूव करने और डिसबर्स करने की स्पीड होंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.