स्टार्टअप्स के फाउंडर्स अब रिक्रूटमेंट फीस बचाने के लिए AI का इस्तेमाल कर रहे हैं। हाल ही में एक फाउंडर ने AI के जरिए सीनियर टैलेंट को हायर करके **₹1 करोड़** की भारी-भरकम फीस बचाई है, जो पारंपरिक रिक्रूटमेंट एजेंसियों के लिए खतरे की घंटी है।
रिक्रूटमेंट का बदलता स्वरूप
पारंपरिक 'एक्जीक्यूटिव सर्च' इंडस्ट्री पर अब टेक्नोलॉजी का दबाव बढ़ रहा है। आमतौर पर बड़ी कंपनियां और स्टार्टअप्स C-suite या वाइस-प्रेसिडेंट स्तर की हायरिंग के लिए सर्च फर्म्स को कैंडिडेट की सालाना सैलरी का करीब 30% तक कमीशन देती हैं। लेकिन अब फाउंडर्स ने इस महंगे मॉडल को दरकिनार करना शुरू कर दिया है।
AI का गणित: कैसे बची रकम?
इस नई प्रक्रिया में AI टूल्स और Large Language Models का इस्तेमाल करके पब्लिक डेटा, परफॉरमेंस रिकॉर्ड और प्रोफाइलिंग का विश्लेषण किया जाता है। इस自动化 (ऑटोमेशन) प्रक्रिया ने कंपनियों को बाहरी एजेंसियों पर निर्भरता खत्म करने में मदद की है। शुरुआती दौर की कंपनियों के लिए, जहां कैश-फ्लो और कॉस्ट मैनेजमेंट सबसे जरूरी है, यह बचत सीधे उनके EBITDA मार्जिन को बेहतर बना रही है।
क्या इसमें कोई जोखिम (Risk) है?
निवेशकों को यह समझना होगा कि सीनियर लीडरशिप की हायरिंग सिर्फ स्किल्स का मिलान नहीं है। सर्च फर्म्स अक्सर सैलरी नेगोशिएशन, बैकग्राउंड वेरिफिकेशन और 'कल्चरल फिट' जैसे अनमोल काम करती हैं। अगर AI के जरिए किया गया गलत चुनाव किसी सीनियर लीडर की विफलता का कारण बनता है, तो कंपनी को रिक्रूटमेंट फीस से कहीं ज्यादा नुकसान हो सकता है।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बड़ी कंपनियां भी इस मॉडल को अपनाती हैं या यह सिर्फ स्टार्टअप्स तक ही सीमित रहेगा। फिलहाल, रिक्रूटमेंट मार्केट में एक बड़ा बदलाव साफ नजर आ रहा है।
