दक्षिण कोरियाई रेगुलेटर ने Meta Platforms से मांग की है कि वह अपनी यूथ प्रोटेक्शन पॉलिसी को केवल कुछ देशों तक सीमित न रखकर इसे पूरी दुनिया में लागू करे। रेगुलेटरी दबाव और बढ़ते कानूनी खर्चों के बीच कंपनी के मार्जिन पर लगातार असर पड़ रहा है।
रेगुलेटरी शिकंजा और नई चुनौतियां
कोरिया मीडिया एंड कम्युनिकेशंस कमीशन ने औपचारिक रूप से Meta से कहा है कि वह बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाई गई अपनी पॉलिसी को ग्लोबल स्तर पर एक समान रखे। फिलहाल, ये कंपनियां स्थानीय कानूनों के हिसाब से नियम बदल लेती हैं, लेकिन अब रेगुलेटर्स चाहते हैं कि सुरक्षा प्रोटोकॉल पूरी दुनिया में एक जैसे हों।
घटते प्रॉफिट मार्जिन और वित्तीय दबाव
कंपनी के लिए यह समय काफी नाजुक है। Q2 2026 के नतीजों में रेवेन्यू $60.8 बिलियन रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 28% अधिक है। हालांकि, चिंता की बात यह है कि कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन 43% से गिरकर 31% पर आ गया है। इस गिरावट की दो बड़ी वजहें हैं—आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी खर्च और बढ़ते कानूनी विवाद।
Meta ने किशोरों की लत से जुड़े मुकदमों को सुलझाने के लिए अगले एक दशक में $18 बिलियन तक का भुगतान करने का समझौता किया है। इसके अलावा, कंपनी के पास डेटा सेंटर लीज और AI डेवलपमेंट जैसी भविष्य की देनदारियां करीब $420 बिलियन तक पहुंच गई हैं।
निवेशकों के लिए संकेत
दक्षिण कोरियाई संसद में टेक दिग्गजों की जवाबदेही बढ़ाने के लिए सात नए बिल विचाराधीन हैं। यह बताता है कि आने वाले समय में ग्लोबल रेगुलेटरी दबाव और बढ़ सकता है। निवेशकों के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण यह देखना होगा कि Meta अपनी बढ़ती लागत और रेगुलेटरी नियमों के बीच प्रॉफिट मार्जिन को कैसे मैनेज करती है।
