Snapdeal, जो अब AceVector Ltd के नाम से जानी जाती है, ने अपने बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी अब भारत के छोटे शहरों में वैल्यू-कॉन्शियस खरीदारों को टारगेट कर रही है। पुराने सेलर कमीशन मॉडल की जगह सर्विस-फी मॉडल अपनाने से कंपनी का लक्ष्य बजट-फ्रेंडली फैशन मार्केट पर कब्जा करना है। यह कदम भारतीय ई-कॉमर्स में उस बड़े ट्रेंड को दिखाता है जहाँ कंपनियां हैवी डिस्काउंट से हटकर विज्ञापन और लॉजिस्टिक्स से सस्टेनेबल रेवेन्यू बनाने की ओर बढ़ रही हैं।
क्या हुआ?
ई-कॉमर्स कंपनी Snapdeal, जो अब AceVector Ltd के तहत काम कर रही है, एक बड़ा स्ट्रेटेजिक बदलाव ला रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स और जनरल मर्चेंडाइज पर शुरुआती फोकस से हटकर, अब यह प्लेटफॉर्म बजट को ध्यान में रखने वाले कंज्यूमर्स के लिए लाइफस्टाइल और फैशन डेस्टिनेशन के तौर पर खुद को पोजिशन कर रहा है। खासकर, भारत के टियर-II और टियर-III शहरों में। कंपनी का दावा है कि इस नए अप्रोच के दम पर पिछले सात तिमाहियों में इसका बिजनेस दोगुना हो गया है।
सर्विस फीस की ओर बड़ा कदम
इस स्ट्रेटेजी का अहम हिस्सा है पारंपरिक कमीशन का खत्म होना। पहले ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म हर बिक्री पर सेलर्स से 20% से 25% तक कमीशन लेते थे। नए मॉडल के तहत, प्लेटफॉर्म पर ज्यादातर सेलर्स अब जीरो-कमीशन पर काम कर रहे हैं।
प्रोडक्ट्स की बिक्री से कट लेने के बजाय, कंपनी अब एडवरटाइजिंग सर्विसेज और लॉजिस्टिक्स फीस से रेवेन्यू कमा रही है। यह मॉडल सेलर्स को अपने प्रोडक्ट्स को ज्यादा कॉम्पिटिटिव प्राइस पर बेचने की सहूलियत देता है, वहीं प्लेटफॉर्म को बेचे गए प्रोडक्ट्स के बजाय दी गई सर्विसेज से पैसा बनाने के नए तरीके मिल रहे हैं।
वैल्यू-सेवी कंज्यूमर पर फोकस
कंपनी फैशन और लाइफस्टाइल प्रोडक्ट्स पर हैवी फोकस कर रही है, जहाँ 80% से ज्यादा बिक्री ₹599 से कम कीमत वाले आइटम्स से आती है। प्लेटफॉर्म पर एवरेज सेलिंग प्राइस लगभग ₹420 है। इस प्राइस पॉइंट पर फोकस करके, कंपनी "वैल्यू-सेवी" शॉपिंग करने वालों को टारगेट कर रही है – ऐसे कंज्यूमर्स जो हाई-एंड ब्रांड्स के बजाय अफोर्डेबल, एस्पिरेशनल प्रोडक्ट्स पसंद करते हैं। कंपनी के अनुसार, उनका प्लेटफॉर्म डिस्कवरी-लेड है, यानी लगभग 70% परचेज यूजर द्वारा किसी खास आइटम को सर्च करने के बजाय ब्राउजिंग से होते हैं।
बिजनेस का बैकग्राउंड और सेक्टर का दबाव
यह कदम ऐसे समय पर आया है जब भारतीय ई-कॉमर्स सेक्टर 'भारत' मार्केट – यानी नॉन-मेट्रो शहरों और कस्बों – पर फोकस कर रहा है। वैल्यू-ई-कॉमर्स सेगमेंट में हाई कंपटीशन देखने को मिल रहा है, क्योंकि प्लेटफॉर्म्स प्राइस-सेंसिटिव कस्टमर्स को एक्वायर करने के लिए लड़ रहे हैं।
हालांकि कंपनी सीधे प्रीमियम ई-कॉमर्स प्लेयर्स से मुकाबला नहीं कर रही है, लेकिन ऐसे सेगमेंट में प्रॉफिटेबिलिटी बनाए रखना एक बड़ा चैलेंज है जहाँ मार्जिन बहुत पतला होता है। एसेट-लाइट, एडवरटाइजिंग-ड्रिवेन रेवेन्यू मॉडल की ओर बढ़ना एक ऐसी स्ट्रेटेजी है जिसे Meesho जैसे प्लेयर्स भी इस्तेमाल करते हैं, ताकि ट्रेडिशनल इन्वेंट्री-लेड मॉडल्स के भारी खर्चों के बिना स्केल बनाया जा सके।
जोखिम और सस्टेनेबिलिटी
एक ई-कॉमर्स बिजनेस के लिए, सबसे बड़ी चुनौती सस्टेनेबल प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करना है। हालांकि जीरो-कमीशन मॉडल बड़ी संख्या में सेलर्स और बायर्स को आकर्षित करता है, बिजनेस काफी हद तक एडवरटाइजिंग और लॉजिस्टिक्स आर्म्स की सफलता पर निर्भर है। अगर कंपनी इन सर्विसेज को एफिशिएंटली स्केल नहीं कर पाती है, तो कम कीमत वाले फैशन प्रोडक्ट्स पर पतला मार्जिन बॉटम लाइन पर दबाव डाल सकता है। इसके अलावा, कीमत के प्रति सचेत कंज्यूमर के लिए कॉम्पिटिशन बहुत कड़ा है, क्योंकि बड़े कॉंग्लोमेरेट्स और अन्य स्पेशलाइज्ड ई-कॉमर्स प्लेयर्स उसी ज्योग्राफिक सेगमेंट में भारी निवेश कर रहे हैं।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
चूंकि AceVector Ltd एक अनलिस्टेड एंटिटी है, यह लिस्टेड रिटेल कंपनियों की तरह पब्लिक स्टॉक परफॉर्मेंस या क्वार्टरली फाइलिंग्स शेयर नहीं करती है। हालांकि, यह शिफ्ट ई-कॉमर्स सेक्टर के इवोल्यूशन को समझने का एक क्लियर व्यू देता है। फ्यूचर में जिन चीजों पर नजर रखनी चाहिए उनमें कंपनी की कस्टमर एक्विजिशन कॉस्ट को कम रखने की क्षमता, उसके एडवरटाइजिंग रेवेन्यू का ग्रोथ, और यह कि क्या वह वैल्यू-ई-कॉमर्स मार्केट में बड़ा हिस्सा कैप्चर करने की कोशिश में अपने लीन कॉस्ट स्ट्रक्चर को बनाए रख सकती है।
