स्मार्टफोन कंपनियां अब अपना पूरा फोकस बजट फोन से हटाकर प्रीमियम और AI-पावर्ड डिवाइसेज पर शिफ्ट कर रही हैं। रिटेल कीमतों में **21%** तक के इजाफे के बीच कंपनियां अपने मार्जिन को बचाने के लिए यह बड़ा बदलाव कर रही हैं।
स्मार्टफोन मार्केट में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। 'इंडिया मोबाइल कांग्रेस' (India Mobile Congress) में सामने आए रुझानों के मुताबिक, कंपनियां अब वॉल्यूम-ड्रिवेन ग्रोथ को छोड़कर प्रीमियम सेगमेंट की तरफ दौड़ रही हैं। इसकी मुख्य वजह है 'मेमोरी सुपर साइकिल', जिसके कारण DRAM और NAND स्टोरेज जैसे जरूरी कंपोनेंट्स के दाम आसमान छू रहे हैं।
लागत में कितनी बढ़ोतरी?
कभी फोन के कुल पार्ट्स में मेमोरी की लागत 20% से कम होती थी, लेकिन अब यह 45% तक पहुंच गई है। नतीजतन, साल 2026 में भारत में स्मार्टफोन की औसत रिटेल कीमतों में 21% की भारी बढ़ोतरी हुई, जो दुनिया भर में सबसे ज्यादा है।
नई रणनीति और आने वाले फोन
बजट सेगमेंट की मांग कम होने से कंपनियों ने अब फ्लैगशिप डिवाइसेज पर दांव लगाया है। Xiaomi, Motorola और iQOO जैसी दिग्गज कंपनियां अपने नए रोडमैप के साथ तैयार हैं। जल्द ही बाजार में Xiaomi 18 Pro, Motorola Signature 27 और iQOO 16 जैसे मॉडल आ सकते हैं, जिनमें Snapdragon 8 Elite Gen 6 जैसे दमदार प्रोसेसर देखने को मिलेंगे।
रिस्क फैक्टर क्या है?
फिलहाल ₹20,000 से कम कीमत वाले सेगमेंट में भारी सुस्ती है। कंपनियों के लिए चुनौती यह है कि वे बढ़ती महंगाई और डॉलर के मुकाबले रुपये के उतार-चढ़ाव के बीच अपने मुनाफे को कैसे बरकरार रखती हैं। निवेशकों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह 'प्रीमियम शिफ्ट' वॉल्यूम में आई गिरावट की भरपाई कर पाएगा या नहीं।
