Sify Technologies ने सितंबर तिमाही में शानदार वापसी करते हुए **₹4 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में कंपनी को **₹27.5 करोड़** का घाटा हुआ था। कंपनी का रेवेन्यू **31%** बढ़कर **₹1,379 करोड़** हो गया है, लेकिन अब निवेशकों की नजर इसके भारी-भरकम केपेक्स (Capex) और डेटा सेंटर बिजनेस के संभावित IPO पर टिकी है।
कंपनी के फाइनेंशियल टर्नअराउंड की बात करें तो सितंबर 2026 की तिमाही में कंपनी का प्रदर्शन काफी उत्साहजनक रहा है। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग के कारण कंपनी अपनी प्राइसिंग पावर बनाए रखने में कामयाब रही है। हालांकि, मुनाफे की इस खुशी के साथ-साथ निवेशकों के लिए कंपनी का भारी खर्च एक बड़ा चिंता का विषय बना हुआ है।
केपेक्स का दबाव और विस्तार
तिमाही के दौरान कंपनी ने अपनी डेटा सेंटर क्षमता को बढ़ाने के लिए ₹857 करोड़ का भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर किया है। वर्तमान में कंपनी 136 MW की क्षमता के साथ काम कर रही है और अगले नौ महीनों में 113 MW की अतिरिक्त क्षमता को लाइव करने की तैयारी है। फिलहाल कंपनी के रेवेन्यू में नेटवर्क सर्विसेज का हिस्सा 43%, डेटा सेंटर्स का 37% और डिजिटल सर्विसेज का 20% है।
IPO पर सस्पेंस और रिस्क
कंपनी की सब्सिडियरी 'Sify Infinit Spaces' के IPO को लेकर काफी समय से अनिश्चितता बनी हुई है। मैनेजमेंट बैंकर्स के साथ लिस्टिंग की टाइमिंग पर चर्चा कर रहा है, लेकिन रेगुलेटरी अप्रूवल केवल जनवरी 2027 तक ही वैध है। यदि इस समय सीमा के भीतर IPO नहीं आता है, तो प्रक्रिया को फिर से शुरू करने में अतिरिक्त समय और लागत का बोझ बढ़ सकता है। बाजार के जानकारों का मानना है कि प्रतिस्पर्धा भरे डेटा सेंटर सेक्टर में कंपनी को अपने मार्जिन और कर्ज के बीच बेहतर तालमेल बिठाना होगा ताकि भविष्य में प्रॉफिटेबिलिटी को बरकरार रखा जा सके।
