लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म Shiprocket अब एक नई सर्विस की टेस्टिंग कर रहा है, जिससे रेस्टोरेंट्स फूड एग्रीगेटर्स की भारी-भरकम कमीशन से बच सकेंगे। अपनी 'fastrr' सर्विस और 'Shiprocket Quick' नेटवर्क के जरिए कंपनी रेस्टोरेंट्स को सीधे ग्राहकों तक पहुँचने में मदद करेगी।
कमीशन के बोझ से आजादी की कोशिश
फूड डिलीवरी के मौजूदा मार्केट में रेस्टोरेंट्स को एग्रीगेटर ऐप्स को ऑर्डर वैल्यू का 20% से ज्यादा तक कमीशन के रूप में देना पड़ता है। Shiprocket के इस नए डायरेक्ट-ऑर्डरिंग मॉडल का मुख्य उद्देश्य रेस्टोरेंट्स के मुनाफे को बढ़ाना है।
कैसे काम करेगा यह मॉडल?
यह सर्विस दो प्रमुख टूल्स का मेल है। 'fastrr' प्लेटफॉर्म के जरिए रेस्टोरेंट्स अपना कस्टमर डेटा और लॉयल्टी प्रोग्राम मैनेज कर पाएंगे, जबकि 'Shiprocket Quick' डिलीवरी लॉजिस्टिक्स को संभालेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि रेस्टोरेंट्स को अपनी खुद की डिलीवरी टीम नहीं रखनी होगी, क्योंकि शिप्रॉकेट Ola, Porter, Borzo और Shadowfax जैसे थर्ड-पार्टी सर्विसेज के राइडर्स को एक साथ जोड़कर ऑर्डर डिलीवर करेगा।
प्रतिस्पर्धा और चुनौतियां
इस कदम के साथ Shiprocket अब DotPe, uEngage और सरकारी ONDC जैसे प्लेयर्स को सीधी टक्कर दे रहा है। शुरुआत में Punjabi Angithi और Bikkgane Biryani जैसे ब्रांड्स इस पायलट प्रोग्राम का हिस्सा बने हैं।
हालांकि, सबसे बड़ा सवाल 'कस्टमर एक्विजिशन' (नए ग्राहक जुटाने) का है। एग्रीगेटर ऐप्स के पास विशाल डेटा और मार्केटिंग पावर होती है, जो नए ग्राहक लाने के लिए जरूरी है। अगर डायरेक्ट मॉडल में मार्केटिंग का खर्च कमीशन बचाने से ज्यादा हो गया, तो रेस्टोरेंट्स के लिए यह चुनौती बन सकती है। अब देखना यह होगा कि क्या ब्रांड्स अपने दम पर ग्राहकों को रिटेन कर पाते हैं और यह मॉडल बड़े पैमाने पर सफल हो पाता है या नहीं।
