BCG की नई रिसर्च बताती है कि कंपनियों को अब AI एजेंट्स को सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि एक कर्मचारी की तरह ट्रीट करना होगा। यह बदलाव फिक्स्ड कॉस्ट के मॉडल को वेरिएबल खर्चों में बदल रहा है, जहां निवेशकों को अब रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI) पर कड़ी नजर रखनी होगी।
बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) की एक हालिया रिपोर्ट ने कॉर्पोरेट जगत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अपनाने के तरीके पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जैसे-जैसे कंपनियां साधारण चैटबॉट्स से आगे बढ़कर ऑटोनॉमस (Autonomous) AI एजेंट्स की तरफ बढ़ रही हैं, 'इंस्टॉल करो और भूल जाओ' वाली पुरानी रणनीति अब फेल हो रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन एजेंट्स की सफलता में 70% योगदान इंसानी प्रक्रियाओं और ऑर्गेनाइजेशनल स्ट्रक्चर का है, जबकि टेक्नोलॉजी का हिस्सा सिर्फ 30% है।
सॉफ्टवेयर से एजेंट इकोनॉमिक्स का सफर
निवेशकों के लिए पारंपरिक सॉफ्टवेयर और AI एजेंट्स के बीच का अंतर समझना बहुत जरूरी है। पारंपरिक सॉफ्टवेयर में अक्सर फिक्स्ड लाइसेंस फीस या सब्सक्रिप्शन होता है। इसके विपरीत, AI एजेंट्स में खर्च इस आधार पर होता है कि उन्होंने कितने काम (tasks) पूरे किए हैं—बिल्कुल एक कर्मचारी की सैलरी की तरह। अगर कंपनियां इसे सही ढंग से मैनेज नहीं करती हैं, तो यह अनियंत्रित ऑपरेशनल खर्चों का कारण बन सकता है, जिसका सीधा असर कंपनी के मुनाफे पर पड़ेगा।
BCG का अनुमान है कि रिटेल बैंकिंग जैसे सेक्टर में AI एजेंट्स के जरिए 2030 तक प्रॉफिटेबिलिटी में 30% तक का सुधार संभव है। हालांकि, यह इस पर निर्भर करेगा कि कंपनी इन एजेंट्स को अपने डेली वर्कफ्लो में कैसे ढालती है।
गवर्नेंस और जवाबदेही की भूमिका
एजेंट को कर्मचारी की तरह देखने का मतलब उसे इंसान बनाना नहीं, बल्कि कॉर्पोरेट जवाबदेही तय करना है। जिस तरह एक कर्मचारी को काम की निगरानी के लिए मैनेजर की जरूरत होती है, वैसे ही AI एजेंट्स के लिए 'ह्यूमन-इन-द-लूप' मॉनिटरिंग जरूरी है। इससे 'ड्रिफ्ट' (Drift) जैसी समस्याओं को रोका जा सकता है, जहां एजेंट अपने मूल लक्ष्य से भटक जाता है।
निवेशकों के लिए जरूरी बातें
अगली बार जब आप किसी कंपनी के अर्निंग्स कॉल (Earnings Call) सुनें, तो केवल कुल AI खर्च न देखें। इसके बजाय यह ट्रैक करें कि कंपनी अपने 'एजेंटिक वर्कफ्लो' की यूनिट इकोनॉमिक्स को कैसे मापती है। सफल कंपनियां वही होंगी जो यह साबित कर सकेंगी कि उनके AI एजेंट्स वास्तव में ऑपरेशनल कॉस्ट कम कर रहे हैं या रेवेन्यू बढ़ा रहे हैं। निवेशकों को उन कंपनियों पर दांव लगाना चाहिए जिनके पास AI गवर्नेंस और स्ट्रक्चरल सुपरविजन का मजबूत ढांचा मौजूद है, न कि सिर्फ उन पर जो लेटेस्ट सॉफ्टवेयर टूल्स में अंधाधुंध पैसा झोंक रही हैं।
