ServiceNow के इंडिया MD कुलमीत बावा ने पुरानी IT कंपनियों को आगाह किया है कि अगर उनका डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर व्यवस्थित नहीं है, तो AI लागू करने के चक्कर में वे बड़ी मुसीबत में फंस सकते हैं। कंपनी ने इस समस्या के समाधान के लिए नए AI-गवर्नेंस टूल्स पेश किए हैं।
ServiceNow के इंडिया मैनेजिंग डायरेक्टर कुलमीत बावा ने उन तमाम पुरानी IT कंपनियों को आगाह किया है, जो पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर के ऊपर AI को जबरदस्ती थोपने की कोशिश कर रही हैं। बावा के अनुसार, दशकों से चले आ रहे बिखरे हुए डेटा सिस्टम (Siloed Data) आधुनिक AI मॉडल्स की जटिल जरूरतों को पूरा करने में पूरी तरह असमर्थ हैं।\n\n### डेटा के बिखराव से बढ़ रहा खतरा\nकई बड़ी कंपनियों ने बरसों से मर्जर और अलग-अलग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया है, जिससे उनका डेटा अलग-अलग जगहों पर बिखरा हुआ है। जब कंपनियां इस अव्यवस्थित नींव पर AI एजेंट्स को तैनात करती हैं, तो परिणाम इनोवेशन की जगह काम में बाधा डालने वाले होते हैं। बावा का मानना है कि डेटा आर्किटेक्चर को दुरुस्त किए बिना सीधे AI लागू करना एक बड़ी भूल है, जो भविष्य में IT ऑपरेशंस को पूरी तरह फेल कर सकती है।\n\n### ServiceNow का 'कंट्रोल टावर' मॉडल\nइस समस्या से निपटने के लिए, ServiceNow ने 6 अक्टूबर, 2026 को 'AI Workflow Factory' और 'Autonomous Engineer' जैसे नए समाधान लॉन्च किए हैं। कंपनी अब खुद को एक 'AI कंट्रोल टावर' के रूप में पेश कर रही है, जहां बिना सेंट्रलाइज्ड गवर्नेंस के AI का सफल इस्तेमाल नामुमकिन है। कंपनी का साफ कहना है कि अब कंपनियों को बिना सोचे-समझे AI बढ़ाने के बजाय मजबूत और कंप्लायंट डेटा फ्रेमवर्क बनाने पर जोर देना चाहिए।\n\n### क्या है ग्राउंड रियलिटी?\nमार्केट डेटा के अनुसार, भारत की केवल 22% कंपनियों के पास ही वह जरूरी गवर्नेंस फ्रेमवर्क मौजूद है, जो उनकी AI महत्वाकांक्षाओं के लिए काफी हो। उचित बुनियादी ढांचे के बिना कंपनियां न केवल अपने पैसे बर्बाद कर रही हैं, बल्कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) जैसे रेगुलेटर्स के नियमों का उल्लंघन करने का रिस्क भी उठा रही हैं।\n\nइन्वेस्टर्स के लिए अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनियां अपनी पुरानी प्रणालियों को कितनी तेजी से AI-रेडी बनाती हैं। आने वाले क्वार्टर्स में यह साफ हो जाएगा कि कंपनियां AI ऑटोमेशन के लिए डेटा गवर्नेंस पर कितना बड़ा निवेश करने को तैयार हैं।
