ServiceNow ने अपने AI एनुअल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू टारगेट को बढ़ाकर **$1.5 बिलियन** कर दिया है। कंपनी का मानना है कि AI एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर को रिप्लेस नहीं कर सकता, हालांकि स्टॉक में उतार-चढ़ाव जारी है और यह **52-वीक लो** के करीब ट्रेड कर रहा है।
ServiceNow ने उन मार्केट चिंताओं को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें 'Claudification' यानी जेनरेटिव AI मॉडल के कारण मौजूदा एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर के खत्म होने का डर जताया जा रहा था। कंपनी के प्रेसिडेंट अमित ज़वेरी ने साफ किया कि एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर की असल वैल्यू सिर्फ कोड लिखने तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, AI कोड तो जनरेट कर सकता है, लेकिन यह कुल ओनरशिप कॉस्ट का केवल 20% है। बाकी 80% हिस्सा गवर्नेंस, सिक्योरिटी, मेंटेनेंस और कंप्लायंस जैसे जटिल कार्यों का है, जिसके लिए गहरे वर्कफ्लो इंटीग्रेशन की जरूरत होती है।
भरोसे का नया टारगेट
अपनी रणनीति को मजबूती देते हुए कंपनी ने अपने AI एनुअल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू (ACV) टारगेट को $1.5 बिलियन कर दिया है। ServiceNow का तर्क है कि वह एंटरप्राइज वर्कफ्लो के 'ऑपरेटिंग सिस्टम' के तौर पर काम करती है, जिसे महज एक स्टैंडअलोन AI टूल से बदलना नामुमकिन है।
स्टॉक में क्यों है सुस्ती?
मजबूत बिजनेस आउटलुक के बावजूद, 2026 में कंपनी के शेयर काफी उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। स्टॉक अभी अपने 52-वीक लो के पास ट्रेड कर रहा है। यह अंतर बताता है कि निवेशक ग्रोथ सॉफ्टवेयर कंपनियों के वैल्यूएशन और भविष्य में मार्जिन पर पड़ने वाले दबाव को लेकर सतर्क हैं।
भारत का अहम रोल
ServiceNow के लिए भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाला मार्केट है और इनोवेशन का बड़ा हब भी। कंपनी अपने भारतीय इंजीनियरिंग बेस का इस्तेमाल 'AI कंट्रोल टावर' जैसे गवर्नेंस टूल विकसित करने के लिए कर रही है।
अब बाजार की निगाहें 28 अक्टूबर, 2026 को आने वाली अर्निंग्स रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बढ़ता हुआ AI कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू रेवेन्यू ग्रोथ और ऑपरेशनल एफिशिएंसी में तब्दील हो पाता है या सेक्टर-वाइड चुनौतियां स्टॉक पर भारी पड़ती रहेंगी।
