Semicon India 2026: इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में बड़ा बदलाव, मैन्युफैक्चरिंग से डिजाइन की ओर कदम

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Semicon India 2026: इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में बड़ा बदलाव, मैन्युफैक्चरिंग से डिजाइन की ओर कदम

Semicon India 2026 में दिग्गजों ने असेंबली से आगे बढ़कर डिजाइन और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग पर जोर दिया है। इसका लक्ष्य घरेलू वैल्यू एडिशन को **40-50%** तक ले जाना है। निवेशकों की नजर इस बात पर है कि EMS कंपनियां इस जटिल बदलाव और बड़े निवेश को कैसे मैनेज करेंगी।

Semicon India 2026 इवेंट में दिग्गज कंपनियों ने साफ कर दिया है कि भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को अब अगले स्तर पर जाने की जरूरत है। भारत ने असेंबली के क्षेत्र में अच्छी प्रगति की है, लेकिन ग्लोबल मार्केट में असली बढ़त तभी मिलेगी जब कंपनियां केवल पार्ट्स जोड़ने के बजाय खुद का प्रोडक्ट डिजाइन, कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी पर ध्यान देंगी।

वैल्यू चेन में ऊपर चढ़ने की तैयारी

फिलहाल कई भारतीय मैन्युफैक्चरर्स असेंबली पार्टनर के तौर पर काम करते हैं और आयातित पार्ट्स पर निर्भर हैं। इससे सप्लाई चेन के जोखिम और ग्लोबल प्राइस में उतार-चढ़ाव का खतरा बना रहता है। इवेंट में विशेषज्ञों ने कहा कि कैपेसिटर और रेजिस्टर जैसे कंपोनेंट्स का घरेलू उत्पादन बढ़ाना जरूरी है ताकि वैल्यू एडिशन को 40-50% तक पहुंचाया जा सके।

EMS (इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज) सेक्टर की लिस्टेड कंपनियों के लिए यह एक बड़ा रणनीतिक बदलाव है। डिजाइन फेज में उतरने से मार्जिन में सुधार की उम्मीद तो है, लेकिन इसके लिए रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) और विस्तार में भारी पूंजी लगाने की चुनौती भी सामने है।

चुनौतियां और भविष्य की राह

एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग के लिए केवल सरकारी सब्सिडी काफी नहीं है। डिजिटल ट्विन और सॉफ्टवेयर-डिफाइंड प्रोसेस जैसी टेक्नोलॉजी में निवेश करना होगा। इसके अलावा, कुशल इंजीनियरों की कमी को दूर करना और दुर्लभ खनिजों (Rare Earths) की प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाना भी एक बड़ा टास्क है। जो कंपनियां इन चुनौतियों से पार पा लेंगी, उन्हें लॉन्ग-टर्म में कॉम्पिटिटिव एज मिलेगा।

निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?

इन्वेस्टर्स को कंपनियों की तिमाही रिपोर्ट में दो चीजों पर नजर रखनी चाहिए:

  1. प्रोडक्ट कॉस्ट में घरेलू सोर्सिंग का प्रतिशत।
  2. R&D और नई टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप में किया गया निवेश।

यह सेक्टर धीरे-धीरे हाई-वैल्यू की ओर बढ़ रहा है। कंपनियों का कर्ज और मार्जिन पर दबाव, बिना किसी बड़ी वित्तीय मुश्किल के, इस बदलाव की सफलता की असली कसौटी होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.