Semicon 2.0 स्कीम के तहत **₹1.27 लाख करोड़** के इंसेंटिव्स के बाद वैश्विक दिग्गजों ने भारत में निवेश की झड़ी लगा दी है। Applied Materials और Lam Research जैसी कंपनियां भारत में अपना मैन्युफैक्चरिंग बेस तैयार कर रही हैं, जिसमें Tata Electronics मुख्य भूमिका निभा रहा है।
Semicon 2026 समिट भारत की सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के लिए एक मील का पत्थर साबित हो रही है। सरकार की ₹1.27 लाख करोड़ की Semicon 2.0 स्कीम के चलते अब ग्लोबल टेक कंपनियां केवल दफ्तर खोलने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यहां बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग शुरू कर रही हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रोडक्शन की तैयारी
Tata Electronics इस पूरे मिशन का नेतृत्व कर रहा है। कंपनी देश का पहला 300-mm सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट बना रही है। इस प्लांट की क्षमता 50,000 वेफर्स प्रति महीना रखने का लक्ष्य है। अपनी सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए कंपनी ने जापान, मलेशिया और यूरोप के सप्लायर्स के साथ 16 रणनीतिक पार्टनरशिप की है, ताकि गैस, मशीनरी और अन्य कलपुर्जों की कमी न रहे।
निवेश का महासागर
ग्लोबल कंपनियों ने पैसों की बौछार कर दी है। Applied Materials ने अगले 10 साल में USD 5 बिलियन के निवेश का वादा किया है। वहीं, Lam Research ने ₹10,000 करोड़ के निवेश से लोकल सिलिकॉन कंपोनेंट फैसिलिटी बनाने का ऐलान किया है। कुल मिलाकर सरकारी समर्थन वाली इन परियोजनाओं में USD 12 बिलियन से ज्यादा का निवेश आने की उम्मीद है। साथ ही, ASML ने भी भारत में नया ऑफिस खोलकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
निवेशकों के लिए काम की बात (Risks & Context)
निवेशकों को यह समझना होगा कि सेमीकंडक्टर बिजनेस बहुत ज्यादा कैपिटल-इंटेंसिव होता है। सॉफ्टवेयर के मुकाबले यहां प्रॉफिट तक पहुंचने में कई साल का समय (Gestation Period) लगता है। साथ ही, भारी कर्ज और एग्जीक्यूशन में देरी से बैलेंस शीट पर दबाव बन सकता है। गुजरात, असम और तेलंगाना जैसे राज्यों के बीच मची इस होड़ में सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि 2032 तक कंपनियां अपनी कैपेसिटी यूटिलाइजेशन के लक्ष्य को कैसे पूरा करती हैं।
