AI स्टार्टअप Self Inspection ने ₹10 करोड़ की फंडिंग जुटाई है। इस राउंड का नेतृत्व Sheryl Sandberg के फैमिली ऑफिस, Sandberg Bernthal Venture Partners ने किया है। इस पैसे का इस्तेमाल कंपनी अपनी व्हीकल डैमेज असेसमेंट टेक्नोलॉजी को बढ़ाने, नए क्लाइंट जोड़ने और यूरोप में कारोबार शुरू करने के लिए करेगी।
सेल्फ इंस्पेक्शन: क्या है यह कंपनी?
Self Inspection, 2021 में स्थापित एक टेक्नोलॉजी स्टार्टअप है, जिसने हाल ही में $10 मिलियन (लगभग ₹83 करोड़) की फंडिंग जुटाई है। इस फंडिंग राउंड में Sandberg Bernthal Venture Partners, जो कि मेटा की पूर्व एग्जीक्यूटिव Sheryl Sandberg का फैमिली ऑफिस है, ने अगुवाई की। कंपनी का प्लान इस पूंजी का उपयोग अपनी टेक्नोलॉजी को और बेहतर बनाने, एंटरप्राइज क्लाइंट बेस बढ़ाने और यूरोपीय बाजार में अपनी सेवाएं शुरू करने के लिए करना है। इस राउंड में U.S. AutoForce, Westlake Financial और Costanoa Ventures जैसे निवेशकों ने भी हिस्सा लिया।
कैसे करती है काम?
यह AI- पावर्ड प्लेटफॉर्म यूजर्स को सिर्फ स्मार्टफोन कैमरे का इस्तेमाल करके गाड़ियों के डैमेज का पता लगाने की सुविधा देता है। सॉफ्टवेयर इमेज कैप्चर प्रक्रिया में मदद करता है और फिर डेटा की तुलना व्हीकल डैमेज पैटर्न के डेटाबेस से करके मरम्मत की लागत और जरूरी पुर्जों का अनुमान लगाता है। कंपनी का लक्ष्य मैनुअल इंस्पेक्शन में लगने वाले समय और खर्च को कम करना है। इसके अलावा, यह प्लेटफॉर्म OBD2 कंप्यूटर से डायग्नोस्टिक जानकारी इंटीग्रेट करके और भी विस्तृत रिपोर्ट दे सकता है।
बाजार में पकड़ और ग्राहक
Self Inspection ने रेंटल फ्लीट, ऑटोमोटिव फाइनेंस फर्मों और नीलामी प्लेटफॉर्म्स की सेवा करके अपनी जगह बनाई है। Stellantis का फाइनेंशियल सर्विसेज आर्म इसका एक प्रमुख ग्राहक है, जो लीज-एंड और कॉर्पोरेट फ्लीट असेसमेंट के लिए इस टेक्नोलॉजी का उपयोग करता है। कंपनी का दावा है कि अब तक 10 लाख से ज्यादा व्हीकल इंस्पेक्शन प्रोसेस किए जा चुके हैं, जिससे ग्राहकों को $80 मिलियन (लगभग ₹666 करोड़) से अधिक की बचत हुई है और 300,000 घंटे का ऑपरेशनल समय बचा है।
निवेशकों की नजर
ऑटोमोटिव इंस्पेक्शन सेक्टर में डिजिटल टूल्स की मांग बढ़ रही है। निवेशकों की मुख्य चिंता यह है कि क्या कंपनी बाजार में आ रहे इसी तरह के AI-बेस्ड टूल्स के बीच अपनी बढ़त बनाए रख पाएगी। कंपनी की सफलता AI मॉडल की सटीकता पर निर्भर करेगी, खासकर जब विभिन्न प्रकार के वाहनों और जटिल डैमेज की बात आती है। यूरोपीय बाजार में प्रवेश करने पर कंपनी को अलग-अलग रेगुलेटरी माहौल और वाहन डॉक्यूमेंटेशन के मानकों का सामना करना पड़ेगा। भविष्य में कंपनी की परफॉर्मेंस इस बात पर निर्भर करेगी कि वह अपने मौजूदा क्लाइंट बेस को लंबे समय तक चलने वाले रेवेन्यू कॉन्ट्रैक्ट्स में कैसे बदल पाती है और क्या वह कैपिटल खर्च में बड़ी बढ़ोतरी के बिना अपने ऑपरेशंस को प्रभावी ढंग से बढ़ा पाती है।
