स्पेस टेक स्टार्टअप Satlyt ने एक ऐसी तकनीक का सफल परीक्षण किया है, जिससे सैटेलाइट को 'ऑर्बिटल डेटा सेंटर' में बदला जा सकेगा। स्पेस में ही डेटा प्रोसेस होने से सैटेलाइट-आधारित ऐप्स के फैसले अब और भी तेज होंगे।
स्पेस टेक्नोलॉजी स्टार्टअप Satlyt ने कक्षा (Orbit) में 'एज कंप्यूटिंग' (Edge Computing) को संभव बनाने वाले सॉफ्टवेयर का सफल परीक्षण पूरा कर लिया है। NASA और यूनिवर्सिटी ऑफ ह्यूस्टन के साथ मिलकर किए गए इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य सैटेलाइट्स को वर्चुअल डेटा सेंटर्स में बदलना है। अब तक की पारंपरिक व्यवस्था में भारी-भरकम रॉ डेटा को विश्लेषण के लिए पृथ्वी पर भेजा जाता था, जो काफी समय और बैंडविड्थ बर्बाद करता था।
डेटा की रफ्तार और नई तकनीक
इस नई तकनीक से सैटेलाइट्स अब अंतरिक्ष में ही डेटा प्रोसेस कर सकेंगे। इसका सीधा फायदा यह होगा कि वाइल्डफायर (जंगलों की आग) का पता लगाने या मौसम के बदलावों की रियल-टाइम ट्रैकिंग जैसी चीजें पलक झपकते ही हो सकेंगी। यह डेवलपमेंट ग्लोबल स्पेस सेक्टर के उस ट्रेंड को मजबूत करता है, जहां हार्डवेयर को अधिक ऑटोनॉमस और स्मार्ट बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
13 महीने की कड़ी टेस्टिंग
हालिया 13 महीने के ट्रायल में फिजिकल सैटेलाइट्स और सिमुलेटेड माहौल का हाइब्रिड इस्तेमाल किया गया। हालांकि, यह तकनीक कुशलता से टास्क मैनेज कर रही है, लेकिन चुनौतियां अभी बाकी हैं। अंतरिक्ष में हार्डवेयर को पावर और प्रोसेसिंग पावर की भारी कमी का सामना करना पड़ता है। निवेशकों और इंडस्ट्री ऑब्जर्वर्स के लिए यह साफ है कि भविष्य उसी हार्डवेयर का है जो हाई-परफॉर्मेंस और एनर्जी एफिशिएंसी के बीच बेहतर तालमेल बिठा सके।
आने वाले समय में कंपनी कई अंतरिक्ष यानों के बीच कंप्यूटिंग वर्कलोड साझा करने का डेमो करने वाली है। हालांकि, कमर्शियल स्तर पर इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या यह सॉफ्टवेयर सैटेलाइट के वजन, लागत और एनर्जी बजट को प्रभावित किए बिना अपनी क्षमता साबित कर पाता है या नहीं।
