स्पेस-टेक स्टार्टअप Satlyt ने अपनी तकनीक को नई उड़ान देते हुए **$8 मिलियन** की सीड फंडिंग जुटाई है। कंपनी का लक्ष्य सैटेलाइट्स पर सीधे AI प्रोसेसिंग को सक्षम करना है, जिससे भारी डेटा को पृथ्वी पर भेजने का खर्च और समय बचेगा।
स्पेस-टेक स्टार्टअप Satlyt ने अपनी अत्याधुनिक तकनीक के लिए $8 मिलियन की फंडिंग हासिल कर ली है। Non Sibi Ventures के नेतृत्व में जुटाया गया यह फंड कंपनी को 'वर्चुअल ऑर्बिटल डेटा सेंटर' बनाने में मदद करेगा। इसका सीधा सा मतलब है कि अब सैटेलाइट खुद अंतरिक्ष में ही डेटा प्रोसेस कर सकेंगे, जिससे उन्हें सारा कच्चा डेटा पृथ्वी के ग्राउंड स्टेशनों पर भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
ऑपरेटरों का खर्च कम करने की तैयारी
अभी के दौर में सैटेलाइट ऑपरेटरों के लिए डेटा को पृथ्वी तक पहुँचाना काफी महंगा और धीमा प्रोसेस है। इसके लिए भारी बैंडविड्थ की जरूरत होती है और एक निश्चित समय का इंतजार करना पड़ता है। Satlyt का सॉफ्टवेयर इस समस्या को हल करने के लिए सैटेलाइट्स को आत्मनिर्भर बनाने पर काम कर रहा है, जिससे ऑपरेशनल कॉस्ट में बड़ी कटौती संभव है।
तकनीक और साझेदारी
Satlyt एक सॉफ्टवेयर-फर्स्ट कंपनी है जो मौजूदा सैटेलाइट हार्डवेयर के ऊपर काम करती है। कंपनी पहले ही Momentus के स्पेसक्राफ्ट पर Google DeepMind के 'Gemma' जैसे AI मॉडल्स को चलाकर अपनी क्षमता साबित कर चुकी है। फिलहाल, कंपनी भारतीय हार्डवेयर प्रोवाइडर TakeMe2Space के साथ मिलकर ऑर्बिट में टेस्टिंग कर रही है। इन मिशनों में NASA और सर्विलांस फर्म Stellerian जैसी दिग्गज संस्थाएं भी जुड़ी हैं, जो क्लाउड कंप्यूटिंग और इमेज प्रोसेसिंग की टेस्टिंग पर ध्यान दे रही हैं।
चुनौतियां और भविष्य
हालांकि यह तकनीक क्रांतिकारी है, लेकिन अंतरिक्ष का कठिन वातावरण यानी रेडिएशन और बिजली की सीमित आपूर्ति इसके लिए बड़ी चुनौती है। चूँकि Satlyt अभी एक प्राइवेट स्टार्टअप है और इसका शेयर बाजार में कोई लिस्टिंग नहीं है, इसलिए निवेशकों को यह याद रखना चाहिए कि स्पेस इंडस्ट्री में काफी रिस्क और कैपिटल की जरूरत होती है। अब सबकी नजरें TakeMe2Space के साथ चल रहे मिशनों के नतीजों पर टिकी हैं।
