Sarvam AI के CEO प्रत्युष कुमार ने विदेशी AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर हद से ज्यादा निर्भरता को लेकर आगाह किया है। उनका कहना है कि भारत को 'डिजिटल कॉलोनी' बनने से बचने के लिए स्वदेशी और फुल-स्टैक AI मॉडल तैयार करने की जरूरत है, जिसका असर भारतीय टेक कंपनियों के खर्चों पर पड़ सकता है।
विदेशी निर्भरता का जोखिम
Zoholics कॉन्फ्रेंस के दौरान Sarvam AI के को-फाउंडर और CEO प्रत्युष कुमार ने एक बड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा कि विदेशी AI सिस्टम पर टिके रहना देश को 'डिजिटल कॉलोनी' बना रहा है, जहां डेटा और वैल्यू दोनों पर बाहरी कंपनियों का कंट्रोल है। उन्होंने भारतीय कंपनियों से अपील की है कि वे अपनी खुद की 'फुल-स्टैक AI' नींव तैयार करें।
फुल-स्टैक का फायदा और चुनौती
फुल-स्टैक अप्रोच का मतलब है—फाउंडेशनल मॉडल से लेकर एप्लिकेशन इंटरफेस तक सब कुछ अपना होना। हालांकि इसमें शुरुआती खर्च (Capital Expenditure) काफी ज्यादा है, लेकिन लंबी अवधि में यह डेटा पर बेहतर कंट्रोल और कॉम्पिटिटिव एडवांटेज देता है।
Zoho का नजरिया और UPI का उदाहरण
इस चर्चा में Zoho के फाउंडर श्रीधर वेंबू ने भी अपनी राय रखी। उन्होंने AI के अलावा सेमीकंडक्टर्स और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में भी आत्मनिर्भरता पर जोर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि जैसे UPI ने पेमेंट सेक्टर में क्रांति लाई, वैसे ही स्वदेशी AI सॉफ्टवेयर ग्लोबल दिग्गजों की भारी फीस को कम कर सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
निवेशकों को यह ध्यान रखना होगा कि अगर भारतीय IT कंपनियां 'सॉवरेन AI' (Sovereign AI) की राह पकड़ती हैं, तो उन्हें GPU, डेटा सेंटर्स और टैलेंट पर भारी निवेश करना होगा। इसका सीधा असर शॉर्ट-टर्म प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ सकता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कंपनियां अपनी इनहाउस टेक्नोलॉजी को प्रभावी ढंग से मोनेटाइज कर पाती हैं, या फिर मार्केट पुरानी विदेशी तकनीक पर ही भरोसा बनाए रखता है।
