Samsung ने अपने नए Galaxy Z Fold8 और Flip8 सीरीज के लिए 72 घंटे में 2.7 लाख प्री-ऑर्डर हासिल किए हैं। यह पिछले साल के मॉडलों से काफी तेज शुरुआत है, और खास बात यह है कि इसमें टियर-2 शहरों से भी जबरदस्त मांग देखी गई है, जो प्रीमियम स्मार्टफोन मार्केट के विस्तार का संकेत दे रहा है।
Samsung की फोल्डेबल फोन पर बंपर ओपनिंग
Samsung India ने अपने नए फोल्डेबल स्मार्टफोन लाइनअप, Galaxy Z Fold8 और Galaxy Z Flip8 सीरीज के लिए रिकॉर्ड तोड़ प्री-ऑर्डर दर्ज किए हैं। लॉन्च के सिर्फ 72 घंटों के भीतर, कंपनी ने 2.7 लाख यूनिट्स के प्री-ऑर्डर हासिल कर लिए हैं। यह पिछले साल के फोल्डेबल मॉडलों की तुलना में कहीं ज्यादा तेज रफ्तार है, जिन्हें इतनी संख्या में ऑर्डर जुटाने में 15 दिन लगे थे।
टियर-2 शहरों से आई बंपर डिमांड!
इस बार की बिक्री में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। कंपनी के मुताबिक, कुल प्री-ऑर्डर में से 45% सिर्फ टियर-2 शहरों और उससे आगे के इलाकों से आए हैं। यह दिखाता है कि महंगे और प्रीमियम स्मार्टफोन का क्रेज अब सिर्फ बड़े मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे शहरों में भी बढ़ रहा है। Samsung के लिए यह एक अहम संकेत है कि वह अपने फ्लैगशिप डिवाइसेज के लिए नए बाजार में पैठ बना सकती है।
कीमत और EMI का दांव
नए फोल्डेबल फोन की कीमत प्रीमियम रखी गई है। Galaxy Z Fold8 Ultra की शुरुआती कीमत ₹199,999, Galaxy Z Fold8 की ₹179,999 और Galaxy Z Flip8 की ₹124,999 है। इन प्रीमियम डिवाइसेज की बिक्री बढ़ाने के लिए, Samsung ने 30 महीने की नो-कॉस्ट EMI का ऑफर भी दिया है, जिसमें जीरो डाउन पेमेंट की सुविधा भी शामिल है। यह ग्राहकों के लिए एक बड़ी राहत है, लेकिन कंपनी के लिए यह क्रेडिट रिस्क और कैश फ्लो मैनेजमेंट के लिहाज से एक बड़ा कदम है।
AI फीचर्स और कॉम्पिटिशन
Samsung ने अपने फोल्डेबल फोन को भीड़ भरे स्मार्टफोन बाजार में अलग पहचान देने के लिए AI-पावर्ड प्रोडक्टिविटी टूल्स पर जोर दिया है। इसमें AI-आधारित नोट लेने और मल्टीटास्किंग जैसे फीचर्स शामिल हैं। कंपनी का लक्ष्य है कि उसके फोल्डेबल फोन भी रेगुलर Galaxy S26 जैसे फ्लैगशिप सीरीज की तरह ही प्री-ऑर्डर हासिल करें। इससे यह साबित होता है कि फोल्डेबल फोन अब सिर्फ एक खास सेगमेंट नहीं, बल्कि आम प्रीमियम पसंद बनते जा रहे हैं।
आगे क्या?
निवेशक अब इस बात पर नजर रखेंगे कि शुरुआती प्री-ऑर्डर वॉल्यूम आने वाली तिमाहियों में असल रेवेन्यू और प्रॉफिट में कैसे बदलता है। यह देखना अहम होगा कि टियर-2 शहरों की मांग कितनी बनी रहती है और कंपनी हाई-एंड मैन्युफैक्चरिंग की लागत के साथ-साथ आक्रामक फाइनेंसिंग ऑफर्स को कैसे मैनेज करती है। नए AI टेक्नोलॉजी के इंटीग्रेशन और छोटे शहरों में सप्लाई चेन को मजबूत करने की लागत, इन सबके बीच कंपनी अपनी ऑपरेटिंग मार्जिन को कैसे बनाए रखती है, यह देखना दिलचस्प होगा।
