Samsung India के पब्लिक अफेयर्स और ESG हेड राजीव अग्रवाल ने अपने 4 साल के कार्यकाल के बाद इस्तीफा दे दिया है। यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब कंपनी भारत में प्री-इंस्टॉल्ड ऐप्स और ई-वेस्ट जैसे कड़े रेगुलेटरी नियमों से जूझ रही है।
पूर्व नौकरशाह राजीव अग्रवाल ने इस हफ्ते अपना पद छोड़ दिया है। इससे पहले वे Meta और Uber जैसी बड़ी टेक कंपनियों में भी अहम पॉलिसी भूमिकाएं निभा चुके थे। पिछले 4 सालों से उन्होंने Samsung के सरकारी संबंधों और सस्टेनेबिलिटी पहल का नेतृत्व किया। हालांकि, इस इस्तीफे की कोई आधिकारिक वजह अभी सामने नहीं आई है।
रेगुलेटरी चुनौतियों का दौर
यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब भारत में टेक कंपनियां बदलते नियमों से जूझ रही हैं। Samsung फिलहाल सरकारी अधिकारियों के साथ कई मुद्दों पर बातचीत कर रही है, जिसमें सबसे बड़ा मुद्दा मोबाइल डिवाइस में सरकारी ऐप्स को प्री-इंस्टॉल करने का है। कंपनी ने अब तक इस पर अपनी चिंताएं जताई हैं और इसे यूजर डेटा प्राइवेसी के लिए खतरा बताया है।
इसके अलावा, ई-वेस्ट मैनेजमेंट भी कंपनी के लिए एक बड़ा सिरदर्द है। नए सरकारी नियमों के तहत इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरर्स की रीसाइक्लिंग के लिए जिम्मेदारी और लागत दोनों बढ़ गई हैं।
मार्केट की स्थिति और प्रतिस्पर्धा
भारतीय स्मार्टफोन मार्केट में Samsung की हिस्सेदारी 16.2% है। कड़े मुकाबले के बीच Vivo और Oppo जैसी कंपनियां कड़ी टक्कर दे रही हैं। ऐसे माहौल में एक मजबूत पॉलिसी टीम का होना कंपनी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
निवेशकों के लिए ध्यान देने वाली बात यह है कि Samsung India, ग्लोबल कंपनी Samsung Electronics की सब्सिडियरी है और भारतीय एक्सचेंजों पर इसकी सीधी लिस्टिंग नहीं है। इसलिए, इसका असर सीधे तौर पर शेयर बाजार पर नहीं होगा। हालांकि, अगला पॉलिसी प्रमुख कौन होगा, यह देखना काफी दिलचस्प होगा क्योंकि यह तय करेगा कि आगे चलकर कंपनी सरकार के साथ अपनी रणनीति कैसे बदलती है।
