Samsung India ने देश भर के 20,000 युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की ट्रेनिंग देने का ऐलान किया है। यह पहल दस राज्यों में की जाएगी और इसका मकसद युवाओं को टेक सेक्टर के लिए तैयार करना है। हालांकि, भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों के लिए यह जानना जरूरी है कि Samsung India एक प्राइवेट, अनलिस्टेड कंपनी है, जिसके शेयर NSE या BSE पर ट्रेड नहीं होते।
Samsung India ने 'Samsung Innovation Campus' (SIC) प्रोग्राम के तहत 20,000 युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में ट्रेनिंग देने की घोषणा की है। यह CSR (Corporate Social Responsibility) प्रोजेक्ट देश के दस राज्यों में इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर स्किल्स काउंसिल ऑफ इंडिया (ESSCI) और टेलीकॉम सेक्टर स्किल काउंसिल (TSSC) के साथ मिलकर चलाया जाएगा। इस प्रोग्राम का फोकस 18 से 25 साल के युवाओं को हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग, प्रोजेक्ट-बेस्ड लर्निंग और एक्सपर्ट मेंटरशिप देना है, ताकि वे तेजी से बदलते टेक्नोलॉजी सेक्टर में अपना करियर बना सकें।
ट्रेनिंग का सिलेबस इंडस्ट्री की मौजूदा मांगों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जिससे युवाओं की एम्प्लॉयबिलिटी (Employability) बढ़े और AI के एप्लीकेशन्स (Applications) की गहरी समझ विकसित हो। स्किल डेवलपमेंट पर जोर देकर, कंपनी भारत के भविष्य के टेक टैलेंट पूल को मजबूत करने में योगदान देना चाहती है। यह घोषणा Samsung के भारत में 30 साल पूरे होने के मौके पर आई है।
भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों के लिए एक अहम बात यह है कि Samsung India Electronics Private Limited एक प्राइवेट, अनलिस्टेड कंपनी है। इसका मतलब है कि यह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) या बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्टेड नहीं है, और न ही भारत में इसका कोई IPO लाने की योजना है। इसलिए, निवेशक सीधे इस भारतीय इकाई में निवेश नहीं कर सकते।
Samsung के व्यापक इकोसिस्टम में रुचि रखने वाले निवेशक आमतौर पर दक्षिण कोरियाई पैरेंट कंपनी, Samsung Electronics की ओर देखते हैं, जो वहां लिस्टेड है। ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर बिजनेस को कई तरह के साइक्लिकल रिस्क (Cyclical Risks) का सामना करना पड़ता है, जैसे सेमीकंडक्टर मार्केट में मांग का उतार-चढ़ाव, ग्लोबल मैक्रोइकोनॉमिक प्रेशर, इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री में कड़ी प्रतिस्पर्धा और कच्चे माल की कीमतों में भिन्नता।
हालांकि यह ट्रेनिंग पहल एक CSR प्रयास है, कंपनियां अक्सर ऐसे प्रोग्राम ब्रांड इमेज को मजबूत करने और कुशल श्रमिकों का एक लॉन्ग-टर्म इकोसिस्टम बनाने के लिए चलाती हैं। ऐसे कार्यक्रमों की स्थिरता और परिचालन दक्षता पर उनका अप्रत्यक्ष प्रभाव वो फैक्टर हैं जिन पर पैरेंट कंपनी के स्टेकहोल्डर्स (Stakeholders) लॉन्ग-टर्म में नजर रखते हैं। फिलहाल, इस पहल के लिए मुख्य रूप से दस राज्यों में लक्षित 20,000 व्यक्तियों का सफल प्रशिक्षण देखा जाएगा, जिसे भविष्य की कंपनी रिपोर्ट्स और घोषणाओं के माध्यम से ट्रैक किया जाएगा।
