मार्च 2028 में होने वाले अगले SEMICON India का दायरा बढ़ने जा रहा है। अब इसमें सिर्फ चिप बनाने वाली कंपनियां ही नहीं, बल्कि उन चिप्स का इस्तेमाल करने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरर्स भी शामिल होंगे। भारत का लक्ष्य 2026 के **$64 बिलियन** के मार्केट को 2035 तक **$200 बिलियन** तक पहुंचाना है।
आयोजकों ने अगले SEMICON India की तारीख मार्च 2028 तय की है। यह इवेंट अब केवल सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका मकसद चिप बनाने वाली कंपनियों और उन्हें अपने फाइनल प्रोडक्ट में इस्तेमाल करने वाली इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को एक मंच पर लाना है।
इकोसिस्टम का विस्तार
2026 के एडिशन में 600 कंपनियों ने हिस्सा लिया था, जो पिछले एडिशन की 350 कंपनियों के मुकाबले लगभग दोगुना है। इसमें 300 विदेशी कंपनियां शामिल थीं और लगभग 40,000 लोगों ने विजिट किया। भविष्य में इसे India Mobile Congress के साथ जोड़ने की तैयारी है, ताकि टेलीकॉम और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों को सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन से जोड़ा जा सके।
निवेशकों के लिए क्या है जरूरी?
भारत के India Semiconductor Mission के तहत $200 बिलियन का लक्ष्य बड़ा है, लेकिन राह आसान नहीं है। सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में बहुत ज्यादा कैपिटल (Capital) की जरूरत होती है। निवेशकों को कंपनियों के डेट-टू-इक्विटी (Debt-to-Equity) रेशियो पर बारीक नजर रखनी चाहिए। भारत दुनिया के 20% डिजाइन इंजीनियरों का घर है, लेकिन असली मुनाफा डिजाइन से मैन्युफैक्चरिंग और पैकेजिंग की ओर शिफ्ट होने में छिपा है। सरकारी सब्सिडी का सही इस्तेमाल और ग्लोबल कंपनियों के साथ जॉइंट वेंचर इस सेक्टर की सफलता की कुंजी होंगे।
सेक्टर के जोखिम (Sector Risks)
यह सेक्टर ग्लोबल सप्लाई चेन और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति बहुत संवेदनशील है। ऑटोमोटिव, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती डिमांड के बीच प्रोजेक्ट में देरी या लागत का बढ़ना एक बड़ा रिस्क है। अंततः, इन प्लांट्स की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कितनी जल्दी बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांड्स भारत में बनी चिप्स को अपनाते हैं।
