SAP Labs India की MD सिंधु गंगाधरन ने कंपनियों को चेतावनी दी है कि वे सिर्फ तेजी के चक्कर में AI न अपनाएं, बल्कि ठोस बिजनेस लक्ष्यों पर फोकस करें। निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि कौन सी कंपनियां AI के जरिए असली प्रोडक्टिविटी बढ़ा रही हैं और किसे सिर्फ हवा में बात करने से मतलब है।
AI का सही इस्तेमाल जरूरी
SAP Labs India की मैनेजिंग डायरेक्टर सिंधु गंगाधरन ने कॉरपोरेट सेक्टर में AI के उपयोग पर एक अहम बात कही है। उनका मानना है कि कंपनियां अक्सर बिना किसी स्पष्ट बिजनेस लक्ष्य के सिर्फ तेजी के लिए AI टूल्स का इस्तेमाल कर रही हैं। यह तरीका काफी महंगा साबित हो सकता है क्योंकि यह अंततः कंपनी के बॉटम लाइन (Bottom Line) में कोई खास वैल्यू नहीं जोड़ पाता।
निवेशकों के लिए 'पायलट प्रोजेक्ट' का रिस्क
IT और सॉफ्टवेयर कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती 'पायलट प्रोजेक्ट्स' की है। दुनियाभर में कई कंपनियां ऐसे प्रयोगों पर कैपिटल खर्च कर रही हैं जो कभी प्रोडक्शन स्टेज तक नहीं पहुंच पाते। निवेशकों को उन कंपनियों से सावधान रहना चाहिए जो AI में भारी निवेश का दावा तो करती हैं, लेकिन उससे रेवेन्यू बढ़ने या लागत कम होने का कोई ठोस रोडमैप नहीं दिखा पातीं।
असली पोटेंशियल क्या है?
गंगाधरन ने एक उदाहरण दिया कि कैसे एक AI-पावर्ड बिलिंग एजेंट ने उन कामों को संभाल लिया, जिसके लिए पहले 1,000 से ज्यादा कर्मचारियों की जरूरत पड़ती थी। यह साबित करता है कि AI का असली महत्व कोडिंग की रफ्तार बढ़ाने में नहीं, बल्कि जटिल मानवीय कार्यों को ऑटोमेट करने में है, जिससे ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ती है। अगर सॉफ्टवेयर कंपनियां ऐसे नतीजे देने में कामयाब होती हैं, तो इससे प्रॉफिट मार्जिन और क्लाइंट रिटेंशन दोनों में सुधार होगा।
वर्कफोर्स का अपस्किलिंग (Upskilling) क्यों जरूरी?
निवेशकों को इस बदलाव के 'मानवीय पक्ष' पर भी ध्यान देना चाहिए। जो कंपनियां AI का इस्तेमाल सिर्फ कर्मचारियों की संख्या घटाने (Headcount reduction) के लिए कर रही हैं, वे लंबे समय में रिस्क में हो सकती हैं। कुशल कंपनियां वही हैं जो अपने स्टाफ को नए कौशल सिखाकर उन्हें बेहतर काम के लिए तैयार कर रही हैं।
अब निवेशकों को क्या करना चाहिए?
टेक सेक्टर पर दबाव है कि वह साबित करे कि AI सिर्फ एक 'बजवर्ड' नहीं है। निवेशकों को अब केवल लॉन्च किए गए प्रोजेक्ट्स की संख्या पर ध्यान नहीं देना चाहिए। अब यह देखना जरूरी है कि प्रोजेक्ट कितने स्केलेबल (Scalable) हैं। आने वाले फाइनेंशियल क्वार्टर के अर्निंग कॉल्स में इस बात पर नजर रखें कि AI सॉल्यूशंस से कंपनी की असल कमाई (Revenue Contribution) कितनी बढ़ रही है।
