RoadGrid India ने अपने नए EV चार्जर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के लिए ₹13 करोड़ की सरकारी फंडिंग हासिल कर ली है। यह प्लांट मार्च 2027 तक प्रोडक्शन शुरू कर देगा और इसकी सालाना क्षमता 2,000 यूनिट्स रखने का लक्ष्य है। यह कदम देश के बढ़ते इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) चार्जिंग नेटवर्क को सपोर्ट करेगा।
EV चार्जिंग में RoadGrid का बड़ा कदम
इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) चार्जिंग टेक्नोलॉजी में काम करने वाली कंपनी RoadGrid India ने टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB) के साथ फंडिंग एग्रीमेंट फाइनल कर लिया है। TDB, जो साइंस एंड टेक्नोलॉजी मिनिस्ट्री के तहत काम करता है, कंपनी को ₹13 करोड़ की वित्तीय सहायता देगा। यह पैसा कुल ₹27.5 करोड़ की लागत वाली एक खास प्रोडक्शन फैसिलिटी लगाने के लिए है, जो कंपनी के खास 'यूनिवर्सल EV चार्जर' का निर्माण करेगी।
प्लांट का टाइमलाइन और क्षमता
यह नया मैन्युफैक्चरिंग प्लांट मार्च 2027 तक कमर्शियल ऑपरेशंस के लिए तैयार हो जाएगा। पूरी तरह चालू होने पर, इस प्लांट की सालाना उत्पादन क्षमता 2,000 चार्जर्स तक पहुंचाने का प्लान है। कंपनी का अनुमान है कि इस प्रोजेक्ट से 100 से ज़्यादा नई नौकरियां पैदा होंगी, जो भारत के डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप है। पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम और एम्बेडेड सॉफ्टवेयर जैसे महत्वपूर्ण EV कंपोनेंट्स के लोकल प्रोडक्शन पर फोकस करके, RoadGrid अपने चार्जिंग सॉल्यूशंस के लिए इम्पोर्टेड इक्विपमेंट पर निर्भरता कम करना चाहती है।
बिजनेस मॉडल और मार्केट में मौजूदगी
साल 2020 में स्थापित RoadGrid, EV चार्जिंग इकोसिस्टम के लिए हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों डेवलप करती है। इसका चार्जिंग प्लेटफॉर्म AC और DC दोनों तरह की चार्जिंग को सपोर्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, और यह टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर से लेकर कमर्शियल कारों तक कई तरह के व्हीकल्स के लिए उपयुक्त है। अब तक, कंपनी 100 से ज़्यादा चार्जर्स डिप्लॉय कर चुकी है और मुंबई, इंदौर और कोलकाता जैसे शहरों में 200 से ज़्यादा चार्जिंग पॉइंट्स मैनेज करती है। इसके प्रमुख पार्टनर्स में Hindustan Petroleum Corporation Limited (HPCL), Indian Oil Corporation Limited (IOCL), और VinFast जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं।
सेक्टर का भविष्य और ग्रोथ के मौके
भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को तेजी से अपनाए जाने के चलते चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी मांग है। इंडस्ट्री के अनुमानों के मुताबिक, 2030 तक देश को करीब 400,000 पब्लिक चार्जिंग पॉइंट्स की जरूरत पड़ सकती है। यह अनुमान डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरर्स के लिए एक लंबी अवधि का ग्रोथ अवसर प्रदान करता है, जो भरोसेमंद, इंटरऑपरेबल और किफायती इक्विपमेंट सप्लाई कर सकते हैं।
निवेशकों के लिए, 2027 तक प्रोडक्शन शुरू होने की टाइमलाइन और ₹27.5 करोड़ की फैसिलिटी के लिए बाकी कैपिटल जुटाने की कंपनी की क्षमता पर नज़र रखना ज़रूरी होगा। कंपनी ने हाल ही में प्री-सीरीज A राउंड में ₹12 करोड़ जुटाए थे, जो इस विस्तार को सपोर्ट करने के लिए कुछ हद तक मददगार हो सकते हैं। इस स्पेस में मैन्युफैक्चरर्स के लिए मुख्य बिजनेस रिस्क डोमेस्टिक और इम्पोर्टेड प्लेयर्स से कड़ी प्रतिस्पर्धा है, जो मार्केट के बढ़ने के साथ-साथ प्राइसिंग पावर और प्रॉफिट मार्जिन को प्रभावित कर सकती है।
