एक नई रिसर्च में खुलासा हुआ है कि एडवांस्ड AI मॉडल्स आपस में जानकारी साझा करने में हिचकिचाते हैं। यह कमी मल्टी-एजेंट AI सिस्टम के जरिए ऑटोमेशन की उम्मीद लगाए बैठे निवेशकों और कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है।
तालमेल की कमी और परफॉरमेंस गैप\n\nAdvait Yadav, Sid Black और Oliver Sourbut द्वारा की गई एक हालिया स्टडी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की एक बड़ी खामी को उजागर किया है। रिसर्च में यह पाया गया कि AI मॉडल्स की बुद्धिमत्ता बढ़ाने पर जोर तो दिया जा रहा है, लेकिन वे 'टीम प्लेयर' के तौर पर बुरी तरह फेल हो रहे हैं।\n\nरिसर्च में 8 प्रमुख मॉडल्स का परीक्षण किया गया, जिसमें चौंकाने वाले नतीजे सामने आए। OpenAI के 'o3-mini' ने 50% कलेक्टिव परफॉरमेंस हासिल की, जबकि अधिक एडवांस्ड 'o3' मॉडल केवल 17% ही स्कोर कर पाया, जबकि उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि वे ग्रुप की सफलता को प्राथमिकता दें।\n\n### निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?\n\nआजकल कंपनियां 'मल्टी-एजेंट सिस्टम' (Multi-agent systems) की ओर तेजी से बढ़ रही हैं, ताकि सप्लाई चेन और कस्टमर सर्विस जैसे जटिल कामों को ऑटोमेट किया जा सके। Adya.ai के CEO Shayak Mazumder का कहना है कि मुख्य समस्या 'इंटरनल टोकन जनरेशन' प्रक्रिया है। हर AI एजेंट अपने ही 'थिंकिंग लूप' में फंसा रहता है, जिससे दूसरे एजेंट को डेटा समझाना काफी धीमा और तकनीकी रूप से कठिन काम बन गया है।\n\n### आगे की राह\n\nरिसर्च का निष्कर्ष यह है कि केवल कंप्यूटिंग पावर बढ़ाने से यह समस्या हल नहीं होगी। भविष्य में वे कंपनियां बाजी मार सकती हैं जो 'कोलैबोरेटिव डिजाइन' पर फोकस करेंगी। निवेशकों को अब केवल बड़े मॉडल्स पर नहीं, बल्कि उन मॉडल्स पर नजर रखनी होगी जो आपस में बेहतर तरीके से तालमेल बिठा सकें।