Reliance Jio और Bharti Airtel अब टेलीकॉम के दायरे से बाहर निकलकर अरबों डॉलर का निवेश डेटा सेंटर्स और AI क्लाउड प्लेटफॉर्म्स में कर रहे हैं। निवेशकों को इस भारी भरकम खर्च और नए रेवेन्यू मॉडल पर बारीकी से नजर रखनी होगी।
टेलीकॉम की दुनिया के ये दो बड़े खिलाड़ी अब केवल कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं रहना चाहते। Reliance Jio और Bharti Airtel ने अपनी रणनीति बदलते हुए 'डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर' की ओर बड़ा रुख किया है। भारत की AI-ड्रिवन इकोनॉमी का फायदा उठाने के लिए दोनों कंपनियां हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की एक मजबूत लेयर तैयार कर रही हैं।
Reliance Jio की रणनीति
Jio अपनी फिजिकल एक्सपेंशन को 'Reliance Intelligence' प्रोजेक्ट के जरिए आगे बढ़ा रहा है। कंपनी का टारगेट है कि 2026 के अंत तक जामनगर में 120 मेगावाट की क्षमता वाला AI कैंपस शुरू किया जाए। खास बात यह है कि डेटा सेंटर्स की बिजली की भारी खपत को काबू में रखने के लिए कंपनी 'कैप्टिव रिन्यूएबल एनर्जी' का इस्तेमाल करेगी। वहीं, कंज्यूमर सेगमेंट में Google के साथ मिलकर Jio AI-पावर्ड सर्च और क्लाउड स्टोरेज जैसी सेवाएं दे रहा है।
Bharti Airtel का फोकस
दूसरी तरफ, Airtel अपनी सब्सिडियरी Nxtra के जरिए एंटरप्राइज मार्केट पर कब्जा जमाने की तैयारी में है। Nxtra में $1 बिलियन का निवेश किया गया है, जिससे डेटा सेंटर्स और एज फैसिलिटीज का विस्तार किया जा सके। Airtel का मुख्य फोकस 'डेटा सॉवरेन्टी' (Data Sovereignty) पर है, ताकि बैंकिंग और सरकारी जैसे सेंसिटिव सेक्टर का डेटा भारत में ही रहे। इसके लिए कंपनी IBM के साथ मिलकर क्लाउड टेक्नोलॉजी को अपने इंफ्रास्ट्रक्चर में जोड़ रही है। साथ ही, Perplexity के साथ साझेदारी से वे अपने ब्रॉडबैंड और मोबाइल ग्राहकों को लुभाने की कोशिश में हैं।
निवेशकों के लिए चेतावनी
निवेशकों को यह समझना होगा कि इस बदलाव के लिए बड़ी मात्रा में 'कैपिटल एक्सपेंडिचर' (Capex) की जरूरत है। शुरुआती दौर में इसका असर कंपनी के फ्री कैश फ्लो पर पड़ सकता है। चुनौती यह है कि ये कंपनियां कैसे ग्लोबल क्लाउड दिग्गजों से मुकाबला करती हैं और अपने भारी-भरकम इंफ्रास्ट्रक्चर का कितना बेहतर इस्तेमाल कर पाती हैं। आगामी समय में प्रोजेक्ट्स की टाइमलाइन और एंटरप्राइज अडॉप्शन की दर पर नजर रखना निवेश के लिहाज से बेहद जरूरी होगा।
