Reliance Industries: सैटेलाइट इंटरनेट मार्केट में अब सीधी टक्कर, रिलायंस ने भरी हुंकार

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AuthorNeha Patil|Published at:
Reliance Industries: सैटेलाइट इंटरनेट मार्केट में अब सीधी टक्कर, रिलायंस ने भरी हुंकार

Reliance Industries ने अब ग्लोबल सैटेलाइट इंटरनेट कंपनियों जैसे Starlink के साथ मुकाबला करने के लिए अपनी तैयारी साफ कर दी है। स्पेक्ट्रम एलोकेशन पर जारी बहस के बीच कंपनी का यह रुख भारतीय डिजिटल इकॉनमी के लिए एक बड़ा बदलाव है।

बाजार में नई जंग की तैयारी

Reliance Industries ने साफ कर दिया है कि वह Elon Musk की कंपनी Starlink जैसी ग्लोबल सैटेलाइट इंटरनेट प्रदाताओं के साथ मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार है। लंबे समय से स्पेक्ट्रम एलोकेशन को लेकर चल रहे विवाद के बाद कंपनी का यह रुख आने वाले समय में भारत के टेलीकॉम सेक्टर में नई हलचल पैदा कर सकता है।

डिजिटल डोमिनेंस की अगली लड़ाई

भारत का टेलीकॉम सेक्टर अब उन दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए सैटेलाइट-बेस्ड कनेक्टिविटी पर दांव लगा रहा है, जहां फाइबर-ऑप्टिक बिछाना नामुमकिन है। रिलायंस जियो (Reliance Jio), जो अब तक जमीन आधारित नेटवर्क में लीडर रही है, अब अपनी पकड़ डिजिटल स्पेस के हर कोने में मजबूत करना चाहती है।

स्पेक्ट्रम एलोकेशन का खेल

पूरा मामला अब Department of Telecommunications (DoT) के उन नियमों पर टिका है, जिनसे यह तय होगा कि सैटेलाइट स्पेक्ट्रम किसे और कैसे मिलेगा। रिलायंस पहले 'ऑक्शन-बेस्ड' मॉडल की वकालत कर चुकी है ताकि सबको बराबर का मौका मिले, जबकि ग्लोबल कंपनियां 'एडमिनिस्ट्रेटिव असाइनमेंट' की मांग कर रही हैं।

निवेशकों के लिए जोखिम और अवसर

निवेशकों को यह समझना होगा कि सैटेलाइट नेटवर्क खड़ा करना कोई सस्ता सौदा नहीं है। इसमें भारी कैपिटल खर्च (Capital Expenditure) शामिल है और प्रॉफिटेबिलिटी आने में काफी समय लग सकता है। अगर सरकार प्रशासनिक आधार पर स्पेक्ट्रम बांटने का फैसला लेती है, तो ग्लोबल दिग्गजों के लिए एंट्री आसान हो जाएगी, जिससे मार्जिन पर दबाव बढ़ना तय है। अब सारा फोकस सरकार की फाइनल गाइडलाइन्स पर है, जो भविष्य में टेलीकॉम सेक्टर का कॉम्पिटिटिव लैंडस्केप तय करेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.