Reliance Industries अब टेक दिग्गजों Meta और Google के साथ केवल निवेश तक सीमित नहीं, बल्कि ऑपरेशनल पार्टनरशिप की ओर कदम बढ़ा रही है। कंपनी Meta के साथ मिलकर **₹855 करोड़** के जॉइंट वेंचर में निवेश कर रही है और जामनगर में एक क्लीन-एनर्जी पावर्ड Google Cloud रीजन तैयार कर रही है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज अपनी पुरानी डिजिटल साझेदारी को अब एक नए मुकाम पर ले जा रही है। 2020 में Jio Platforms के दौरान Meta और Google से मिले भारी निवेश के बाद, अब कंपनी इन दिग्गजों के साथ AI को अपनी कोर बिजनेस स्ट्रैटेजी में शामिल कर रही है। इसका मकसद भारत में बढ़ते एंटरप्राइज-लेवल AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग का फायदा उठाना है।
Meta के साथ नई साझेदारी
रिलायंस की पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी, Reliance Intelligence ने Meta के साथ एक जॉइंट वेंचर बनाया है। इसमें कुल ₹855 करोड़ का निवेश किया जाएगा, जिसमें Reliance की 70% और Meta की 30% हिस्सेदारी होगी। यह वेंचर Meta के Llama मॉडल का इस्तेमाल कर भारतीय कंपनियों के लिए AI टूल्स तैयार करेगा, जिससे रिलायंस का B2B मार्केट में दबदबा बढ़ेगा।
जामनगर में Google के साथ क्लाउड हब
वहीं, Google के साथ मिलकर कंपनी जामनगर में एक खास Google Cloud रीजन बना रही है। इसका सबसे बड़ा प्लस पॉइंट रिलायंस की अपनी क्लीन एनर्जी है, जिससे डेटा सेंटर की बिजली लागत में भारी कटौती हो सकती है। Jio के फाइबर नेटवर्क और Google की क्लाउड क्षमता का तालमेल डेवलपर्स के लिए एक मजबूत प्लेटफॉर्म साबित हो सकता है।
निवेशकों के लिए चुनौतियां
यह कदम रिलायंस को डिजिटल वैल्यू चेन में ऊपर तो ले जाएगा, लेकिन यह भारी खर्च (Capital Outlay) वाला सौदा है। AI मॉडल्स को ट्रेन करना और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना कंपनी के कैश फ्लो पर शॉर्ट टर्म में दबाव डाल सकता है। इसके अलावा, Microsoft, Amazon Web Services (AWS), TCS और Infosys जैसे मौजूदा दिग्गजों से रिलायंस को कड़ी टक्कर मिलेगी। मार्केट अब यह देख रहा है कि रिलायंस का जामनगर प्रोजेक्ट और नए AI टूल्स कितनी जल्दी मुनाफा कमाना शुरू करते हैं।
