बेंगलुरु की स्टार्टअप Rekise Marine ने **$9.7 मिलियन (लगभग ₹80 करोड़)** की सीड फंडिंग जुटाई है। इस पैसे का इस्तेमाल भारतीय नौसेना के लिए ऑटोनोमस (autonomous) जहाज बनाने में किया जाएगा। हालांकि यह एक प्राइवेट कंपनी है, लेकिन यह डेवलपमेंट डिफेंस टेक्नोलॉजी के बढ़ते इकोसिस्टम को दिखाता है, जो GRSE जैसे बड़े पब्लिक डिफेंस शिपयार्ड्स में निवेश करने वालों के लिए महत्वपूर्ण है।
क्या हुआ?
मरीन रोबोटिक्स फर्म Rekise Marine ने वेंचर कैपिटल फर्म Accel और NKSquared (Zerodha के को-फाउंडर निखिल कामथ का इन्वेस्टमेंट व्हीकल) की अगुआई में $9.7 मिलियन (लगभग ₹80 करोड़) की सीड फंडिंग पूरी कर ली है। बेंगलुरु की यह कंपनी इस फंड का इस्तेमाल अपने प्रमुख ऑटोनोमस अंडरवॉटर व्हीकल 'Jalkapi' के डेवलपमेंट और सी-ट्रायल्स को तेज करने के लिए करेगी। साथ ही, इंजीनियरिंग टीम का विस्तार भी किया जाएगा। इस फंडिंग के साथ, कंपनी द्वारा जुटाई गई कुल पूंजी $14 मिलियन (लगभग ₹116 करोड़) से अधिक हो गई है। Rekise Marine फिलहाल भारतीय नौसेना के iDEX ADITI प्रोग्राम के तहत 'Jalkapi' बना रही है, जिसका मकसद डिफेंस टेक्नोलॉजी में स्वदेशी इनोवेशन को बढ़ावा देना है।
डिफेंस निवेशक क्यों ध्यान दे रहे हैं?
हालांकि Rekise Marine एक प्राइवेट स्टार्टअप है और सीधे स्टॉक मार्केट पर लिस्टेड नहीं है, लेकिन इसकी ग्रोथ भारतीय डिफेंस सेक्टर में एक बड़े बदलाव का हिस्सा है। भारत सरकार के 'आत्मनिर्भरता' (self-reliance) पर जोर देने से एक ऐसा माहौल बना है जहाँ स्पेशलाइज्ड टेक स्टार्टअप्स बड़ी पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (PSUs) के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
डिफेंस सेक्टर के निवेशकों के लिए, यह डेवलपमेंट स्टार्टअप-PSU पार्टनरशिप मॉडल के बढ़ते महत्व को रेखांकित करता है। Rekise जैसी कंपनियां हाई-एंड सॉफ्टवेयर और ऑटोनोमस टेक पर फोकस करती हैं, जबकि हार्डवेयर निर्माण और इंटीग्रेशन के लिए बड़ी, लिस्टेड शिपयार्ड्स के साथ पार्टनरशिप करती हैं। यह डिविजन ऑफ लेबर गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) जैसी लिस्टेड डिफेंस कंपनियों को हर एक कंपोनेंट को शुरू से इन-हाउस डेवलप किए बिना एडवांस्ड, टेक-हैवी प्लेटफॉर्म्स की डिलीवरी को तेज करने में मदद करता है।
PSU और स्टार्टअप का कनेक्शन
Rekise Marine ने पहले से ही GRSE लिमिटेड सहित प्रमुख पब्लिक शिपयार्ड्स के साथ मिलकर काम करने का ट्रैक रिकॉर्ड बनाया है। कंपनी ने भारतीय नौसेना को डिलीवर किए गए एक ऑटोनोमस सरफेस व्हीकल 'Jaldoot' के डेवलपमेंट में भी भूमिका निभाई थी। रिटेल और इंस्टीट्यूशनल निवेशकों के लिए, ये कोलैबोरेशन एक महत्वपूर्ण संकेत हैं कि कैसे लिस्टेड शिपयार्ड्स अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को मॉडर्न बना रहे हैं। जब कोई PSU एक स्पेशलाइज्ड रोबोटिक्स स्टार्टअप के साथ पार्टनरशिप करता है, तो यह अनमैन्ड वेसल्स जैसे कॉम्प्लेक्स सिस्टम के लिए टाइम-टू-मार्केट को कम करने की एक स्ट्रेटेजिक मूव का संकेत देता है, जो लंबे समय में लिस्टेड पार्टनर्स के ऑर्डर बुक्स को बढ़ा सकता है।
टेक्नोलॉजी का रिस्क
डिफेंस स्पेस पर नजर रखने वाले निवेशकों को ऑटोनोमस मैरीटाइम टेक्नोलॉजी से जुड़े खास जोखिमों के प्रति सतर्क रहना चाहिए। Jalkapi जैसे एक्स्ट्रा-लार्ज ऑटोनोमस अंडरवॉटर व्हीकल (XLUUVs) बनाना एक R&D-इंटेंसिव प्रक्रिया है। इन प्रोजेक्ट्स में अक्सर लंबे डेवलपमेंट पीरियड और सॉफ्टवेयर ऑटोनॉमी, अंडरवॉटर रिलाएबल कम्युनिकेशन और लॉन्ग-एंड्योरेंस पावर मैनेजमेंट से जुड़ी तकनीकी चुनौतियां आती हैं। भले ही ये स्टार्टअप्स इनोवेशन का लक्ष्य रखते हैं, लेकिन ऐसे अत्याधुनिक डिफेंस प्रोजेक्ट्स में टेक्निकल देरी या लागत बढ़ने का खतरा स्वाभाविक है। यदि इन स्टार्टअप्स को कोई झटका लगता है, तो यह उनके लिस्टेड पार्टनर्स द्वारा बनाए जा रहे बड़े प्लेटफॉर्म्स की डिलीवरी टाइमलाइन को प्रभावित कर सकता है।
निवेशकों को आगे क्या देखना चाहिए?
डिफेंस सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों को यह देखना चाहिए कि ये स्टार्टअप पार्टनरशिप लिस्टेड शिपयार्ड्स के लिए कैसे ठोस नतीजे देती हैं। महत्वपूर्ण मॉनिटरेबल्स में शामिल हैं:
- प्रोजेक्ट माइलस्टोन: Jalkapi के सी-ट्रायल्स का सफल समापन, जो इन ऑटोनोमस प्लेटफॉर्म्स की टेक्निकल व्यवहार्यता को मान्य करेगा।
- ऑर्डर: भारतीय नौसेना या अन्य सरकारी एजेंसियों से इन ऑटोनोमस सिस्टम्स के लिए कोई फॉलो-ऑन ऑर्डर या व्यापक स्वीकृति।
- पार्टनरशिप की गहराई: क्या लिस्टेड डिफेंस कंपनियां ऐसे रोबोटिक्स स्टार्टअप्स के साथ अधिक औपचारिक, लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स साइन करती हैं, जो उनके मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम में गहरी इंटीग्रेशन का संकेत देता है।
- सेक्टर पॉलिसी: डिफेंस इनोवेशन ग्रांट्स और iDEX-संबंधित फंडिंग पर अपडेट, जो भारतीय डिफेंस इंडस्ट्री के इस छोटे लेकिन बढ़ते सेगमेंट के लिए कैटेलिस्ट का काम करते रहेंगे।
