India Refurbished Tech Market: नए फोन हुए महंगे, सेकंड-हैंड बाजार में **12%** की बंपर ग्रोथ का अनुमान

TECHNOLOGY
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
India Refurbished Tech Market: नए फोन हुए महंगे, सेकंड-हैंड बाजार में **12%** की बंपर ग्रोथ का अनुमान

भारत में रिफर्बिश्ड (refurbished) यानी सेकंड-हैंड टेक मार्केट में जबरदस्त ग्रोथ देखने को मिल सकती है। अनुमान है कि 2026 तक यह बाजार **12%** की रफ्तार से बढ़ेगा, जबकि नए स्मार्टफोन की शिपमेंट में **11%** की गिरावट आ सकती है।

क्यों बढ़ रही है सेकेंड-हैंड की मांग?

नए स्मार्टफोन और लैपटॉप की कीमतें कंपोनेंट (component) यानी पुर्जों की लागत बढ़ने की वजह से आसमान छू रही हैं। इसकी वजह से ग्राहक अब सर्टिफाइड प्री-ओन्ड (certified pre-owned) यानी प्रमाणित पुराने इलेक्ट्रॉनिक सामान की ओर रुख कर रहे हैं। Counterpoint Research के आंकड़ों के मुताबिक, भारत का रिफर्बिश्ड स्मार्टफोन सेगमेंट 12% सालाना की ग्रोथ रेट पर आगे बढ़ रहा है। वहीं, नए स्मार्टफोन्स का बाजार 11% सिकुड़ने का अनुमान है। लैपटॉप सेगमेंट में भी यही ट्रेंड दिख रहा है।

महंगे कंपोनेंट्स का असर

IDC की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की पहली तिमाही में भारत में स्मार्टफोन की औसत बिक्री कीमत (average selling price) बढ़कर $302 हो गई, जो पिछले साल से 10.4% ज्यादा है। मेमोरी चिप्स और प्रोसेसर जैसे जरूरी कंपोनेंट्स की बढ़ी हुई लागत इस प्राइस हाइक (price hike) की मुख्य वजह है। इंडस्ट्री रिपोर्ट्स बताती हैं कि 85% से ज्यादा स्मार्टफोन मॉडल्स की कीमतों में औसतन 15% का इजाफा हुआ है, और कई नए लॉन्च तो पुराने मॉडल्स से 30% से 40% तक महंगे हैं।

सेक्टर ट्रेंड्स और कंपनियों की रणनीति

नए हार्डवेयर की घटती डिमांड भी इस ट्रेंड को दर्शाती है। Omdia का अनुमान है कि 2026 में भारत में लैपटॉप की शिपमेंट घटकर 1.43 करोड़ यूनिट रह जाएगी, जो 2025 में 1.58 करोड़ यूनिट थी। इस बदलती पसंद को देखते हुए, सैमसंग (Samsung) जैसी बड़ी कंपनियां अपने बिजनेस मॉडल को री-अलाइन (realign) कर रही हैं। सैमसंग ने इसी साल भारत में अपने ऑफिशियल सर्टिफाइड रिफर्बिश्ड प्रोग्राम का विस्तार किया है ताकि सस्ते और भरोसेमंद डिवाइस की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके।

यह बदलाव निवेशकों के लिए भी अहम है। जहां नए डिवाइस की बिक्री ऊंची कीमतों और डिमांड में कमी से जूझ रही है, वहीं सेकेंड-हैंड मार्केट कंपनियों को ब्रांड लॉयल्टी (brand loyalty) बनाए रखने और ग्राहकों से जुड़े रहने का मौका दे रहा है। यह देखना होगा कि क्या बड़ी कंपनियां इन प्रोग्राम्स को और मजबूत करती हैं, क्योंकि इससे छोटे रिफर्बिश्ड डीलर्स के मार्जिन पर असर पड़ सकता है।

Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.