Red Hat: भारत अब AI की दुनिया में बना 'इंजन', कोडिंग में बदल रही है तस्वीर

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AuthorMehul Desai|Published at:
Red Hat: भारत अब AI की दुनिया में बना 'इंजन', कोडिंग में बदल रही है तस्वीर

Red Hat के अनुसार, भारत अब केवल ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर का उपभोक्ता (consumer) नहीं रहा, बल्कि मुख्य योगदानकर्ता बन चुका है। भारतीय इंजीनियरिंग हब अब PyTorch जैसे बड़े AI इंजनों के विकास में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

भारत की नई पहचान: 'सपोर्ट' से 'इनोवेशन' की ओर

लंबे समय तक भारत को ग्लोबल टेक कंपनियों के लिए केवल बैक-एंड सपोर्ट और बिजनेस एप्लिकेशन बनाने वाले सेंटर के रूप में देखा जाता था। लेकिन अब यह ट्रेंड तेजी से बदल रहा है। रेड हैट (Red Hat) के मुताबिक, भारत में मौजूद इंजीनियरिंग टैलेंट अब हाई-यूटिलिटी रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) में बड़ी भागीदारी निभा रहा है। बेंगलुरु और पुणे जैसे शहर इसके प्रमुख उदाहरण बन गए हैं। खास तौर पर पुणे, जो कभी केवल सपोर्ट का केंद्र था, अब कॉम्प्लेक्स क्वालिटी इंजीनियरिंग और AI के कोर डेवलपमेंट का गढ़ बन चुका है।

IBM के साथ तालमेल की चुनौती

इस ग्रोथ के पीछे रेड हैट की मूल कंपनी, IBM का बड़ा हाथ है। कंपनी की बैक-ऑफिस फंक्शन को IBM के साथ एकीकृत (integrate) करने की कोशिश जारी है। निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि रेड हैट कैसे अपनी स्वतंत्र और फुर्तीली 'ओपन-सोर्स कल्चर' को IBM जैसी दिग्गज और पारंपरिक कॉर्पोरेट संरचना के साथ तालमेल बिठाकर बरकरार रखेगी।

ओपन-सोर्स कम्युनिटी और लाइसेंसिंग का पेंच

कंपनी के सामने केवल कॉर्पोरेट चुनौतियां ही नहीं हैं, बल्कि उसे ओपन-सोर्स कम्युनिटी का भरोसा भी जीतना है। पास्ट में लाइसेंसिंग मॉडल्स में बदलाव और कुछ Linux प्रोडक्ट्स को बंद करने के फैसलों की वजह से डेवलपर्स के साथ थोड़ी खटास आई थी। रेड हैट के लिए आने वाले समय में सबसे बड़ी चुनौती अपनी कमर्शियल ग्रोथ और ओपन-सोर्स डेवलपर्स के बीच के भरोसे को कायम रखने की होगी। भारत का बढ़ता प्रभाव इस दिशा में एक पॉजिटिव कदम तो है, लेकिन असली परीक्षा कंपनी की इस रची-बसी संस्कृति को ग्लोबल स्तर पर बनाए रखने में है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.