Red Hat ने भारत को अपने टॉप 5 सबसे तेजी से बढ़ते ग्लोबल मार्केट्स में गिना है। कंपनी का कहना है कि ओपन-सोर्स (Open-Source) टेक्नोलॉजी को अपनाने की दर यहां बहुत तेज है।
Detailed Coverage
भारत बनेगा टेक हब!
Red Hat, जो IBM के तहत एंटरप्राइज ओपन-सोर्स सॉल्यूशंस (Enterprise Open-Source Solutions) देती है, ने भारत को दुनिया भर में अपने सबसे तेजी से बढ़ते टॉप 5 बाजारों में शामिल किया है। कंपनी अब भारत को सिर्फ टेक्नोलॉजी इस्तेमाल करने वाले देश के तौर पर नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग इनोवेशन (Engineering Innovation) और प्रोडक्ट डेवलपमेंट (Product Development) का एक अहम केंद्र बनाने की तैयारी में है। ऐसा इसलिए भी हो रहा है क्योंकि भारत में ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर (Open-Source Software) का इस्तेमाल प्राइवेट कंपनियों और सरकारी प्रोजेक्ट्स में खूब बढ़ रहा है।
ओपन-सोर्स का जलवा
भारत की डिजिटल पहलों, जैसे UPI, आधार और पासपोर्ट सेवाओं में ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल एक बड़ी खासियत बन गया है। इससे सरकार अपनी डिजिटल व्यवस्था में लचीलापन बनाए रखने और विदेशी टेक्नोलॉजी पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रही है। Red Hat के स्थानीय लीडर्स का मानना है कि इससे आत्मनिर्भर AI सॉल्यूशंस (Sovereign AI Solutions) को बढ़ावा मिलेगा, खासकर डिफेंस सेक्टर (Defense Sector) में, ताकि ऐसी टेक्नोलॉजी बने जो भारत की खास जरूरतों को पूरा करे।
AI में दिक्कतें
हालांकि, टेक्नोलॉजी के मामले में तस्वीर अच्छी दिख रही है, लेकिन कंपनी ने भारत में AI (Artificial Intelligence) के क्षेत्र में कुछ बड़ी चुनौतियां भी पहचानी हैं। अभी भारत में AI के जितने भी पायलट प्रोजेक्ट (Pilot Projects) शुरू होते हैं, उनमें से केवल 30% से 40% ही पूरी तरह से प्रोडक्शन (Production) में जा पाते हैं। कंपनी के अधिकारियों ने इसके कई कारण बताए हैं, जैसे AI इंफेरेंसिंग (AI Inferencing) का भारी खर्च, सिक्योर डेवलपमेंट पाइपलाइन (Secure Development Pipeline) को मैनेज करने की जटिलता और खास टैलेंट (Specialized Talent) की कमी। इसके अलावा, कंपनियां अभी इस बात पर भी विचार कर रही हैं कि AI पर होने वाले खर्च को रोजमर्रा के ऑपरेशनल खर्च (Operational Costs) में गिना जाए या लंबे समय के कैपिटल स्पेंडिंग (Capital Spending) में।
नौकरियों पर असर
ऑटोमेशन (Automation) के कारण नौकरियों पर होने वाले असर की बात करें तो, कंपनी को उम्मीद है कि भारत की आर्थिक ग्रोथ (Economic Growth) से पैदा होने वाली कुशलता इन बदलावों को संभाल लेगी। अनुमान है कि भविष्य में लोगों की भूमिकाएं दोहराए जाने वाले कामों से हटकर ज्यादा महत्वपूर्ण निर्णय लेने और विशेषज्ञता (Expertise) वाले कामों की ओर बढ़ेंगी। निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि भारतीय कंपनियां AI प्रोजेक्ट्स को बढ़ाने की चुनौती को कितनी अच्छी तरह पार करती हैं। यही तय करेगा कि कंपनियां Red Hat के एंटरप्राइज-ग्रेड सॉल्यूशंस पर कितना खर्च बढ़ाएंगी। साथ ही, क्लाइंट्स को एक्सपेरिमेंटल पायलट से लॉन्ग-टर्म प्रोडक्शन कॉन्ट्रैक्ट्स (Long-term Production Contracts) में बदलने की कंपनी की क्षमता इस क्षेत्र में उसकी निरंतर ग्रोथ का एक अहम संकेत होगी।
